पंजाब में बाल भिक्षा को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘जीवनजोत’ मुहिम लगातार असर दिखा रही है। इसी कड़ी में मोहाली से एक बड़ी सफलता सामने आई है, जहां महज तीन दिनों के भीतर भिक्षा मांगते हुए 31 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
सड़कों से बचपन को सुरक्षित भविष्य की ओर
कार्रवाई के दौरान प्रशासन की टीमों ने बच्चों को भीख मांगते हुए देखा और तुरंत उन्हें संरक्षण में लिया। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार बच्चों की पहचान, उम्र और पारिवारिक स्थिति की जांच की गई। कई बच्चों को जांच के बाद उनके माता-पिता या अभिभावकों के सुपुर्द किया गया, जबकि जिन बच्चों के हालात सुरक्षित नहीं पाए गए, उन्हें बाल गृहों में सुरक्षित रखा गया।
शिक्षा और पुनर्वास पर सरकार का फोकस
सरकार का साफ उद्देश्य है कि बचाए गए बच्चों को दोबारा सड़कों पर न लौटना पड़े। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य जांच और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें जरूरी चिकित्सा सहायता और काउंसलिंग भी दी जा रही है, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
दोषियों के खिलाफ सख्त रुख
सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने इस कार्रवाई को अहम बताते हुए कहा कि बाल भिक्षा और बच्चों की तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी सख्ती से काम कर रही है।
समाज से सहयोग की अपील
सरकार ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर कहीं बच्चों से भीख मंगवाने या उनका शोषण होते हुए दिखे, तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
पंजाब सरकार की यह मुहिम न केवल बच्चों को नया जीवन दे रही है, बल्कि राज्य को बाल भिक्षा मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
