पंजाब सरकार राज्य के छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार का फोकस खासकर अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के बच्चों की शिक्षा पर है, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कर सकें और अपने भविष्य को मजबूत बना सकें। इसी दिशा में सरकार की ओर से पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार खुद उठाती है।
सरकार ने जारी किए 92 करोड़ रुपये
पंजाब सरकार ने साल 2024-25 के बजट में इस योजना के लिए 245 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की थी। अब सरकार की ओर से अपने हिस्से के 92 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसका सीधा लाभ राज्य के हजारों छात्रों को मिलेगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि मुख्यमंत्री मान की अगुवाई में यह योजना पारदर्शी तरीके से चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य के 6,78,000 से अधिक छात्रों ने इस स्कॉलरशिप योजना का लाभ उठाया है।
राज्य के 11 प्रतिष्ठित कॉलेज इस योजना से जुड़े
पंजाब सरकार ने अब इस योजना के तहत 11 प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों को भी जोड़ा है, ताकि योग्य छात्र मेरिट के आधार पर इनमें दाखिला ले सकें। इन संस्थानों में शामिल हैं —
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एम्स, बठिंडा
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आईआईटी, रूपनगर (रोपड़)
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एनआईटी, जालंधर
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आईआईएम, अमृतसर
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इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, गुरदासपुर
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राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं संसाधन संस्थान, मोहाली
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निट, मोहाली
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आईएसआई, चंडीगढ़
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थापर यूनिवर्सिटी, पटियाला
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राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला
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आईआईएसईआर, मोहाली
उद्देश्य – शिक्षा के जरिए सशक्तिकरण
सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार चाहती है कि हर बच्चा अपने सपनों को साकार कर सके, चाहे उसका आर्थिक या सामाजिक स्तर कुछ भी हो।
