पंजाब में युवाओं को नशे से किताबों की ओर ले जाने की नई पहल की गई है। पंजाब में युवा लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब राज्य के कई गांवों में एक नई सामाजिक क्रांति आकार ले रही है। यह क्रांति हथियारों या नारों की नहीं, बल्कि किताबों और लाइब्रेरी की है। “गांव-गांव लाइब्रेरी मिशन” के जरिए पंजाब में युवाओं को नशे से दूर कर शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सकारात्मक गतिविधियों की ओर जोड़ने की कोशिश तेज हो गई है।
सरकार, पंचायतों और सामाजिक संगठनों की साझेदारी से ग्रामीण इलाकों में आधुनिक लाइब्रेरी मॉडल तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। राज्य सरकार के अनुसार पंजाब में अब तक 196 आधुनिक ग्रामीण लाइब्रेरी शुरू की जा चुकी हैं, जबकि 135 नई लाइब्रेरी निर्माणाधीन हैं। इन लाइब्रेरी में केवल किताबें ही नहीं, बल्कि इंटरनेट, कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का मानना है कि गांवों में ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करने से युवा गलत रास्तों से बचेंगे और रोजगार की दिशा में आगे बढ़ेंगे。
मालवा क्षेत्र, जो लंबे समय से नशे की समस्या के कारण चर्चा में रहा है, वहां कई पंचायतों ने अपने स्तर पर लाइब्रेरी अभियान शुरू किया है। गांवों में वातानुकूलित लाइब्रेरी, बुक क्लब और रीडिंग हॉल बनाए गए हैं। पंचायतों का कहना है कि पहले शाम के समय युवा खाली बैठते थे, लेकिन अब वही युवा लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते दिखाई देते हैं। मान सरकार की पहल के साथ पंजाब के लोग भी जुड़ रहे हैं। कई गांवों में स्थानीय लोग और एनआरआई (NRI) पंजाबी भी किताबें दान कर इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
बरनाला जिले का “बॉक्स लाइब्रेरी मॉडल” भी काफी चर्चा में है। यहां गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर छोटी-छोटी मिनी लाइब्रेरी बनाई गई हैं, जहां से कोई भी व्यक्ति मुफ्त में किताब लेकर पढ़ सकता है। इस पहल का सबसे बड़ा फायदा बच्चों और युवाओं को हुआ है, जिनमें पढ़ने की आदत बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल और नशे की ओर झुक रहे युवाओं को अब किताबों में रुचि आने लगी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार भी “मिशन ज्ञान” के तहत लगातार नई लाइब्रेरी शुरू कर रही है। हाल ही में कई गांवों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा “मिशन प्रगति” जैसी योजनाओं के तहत जिला लाइब्रेरी में मुफ्त कोचिंग और करियर गाइडेंस भी दी जा रही है।
शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकती है। उनका कहना है कि यदि हर गांव में लाइब्रेरी और खेल सुविधाएं विकसित हों, तो पंजाब के युवाओं को नशे से बाहर निकालने में बड़ी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब के सामाजिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम है। गांवों में बढ़ती लाइब्रेरी संस्कृति अब धीरे-धीरे “नशे से किताबों तक” की नई पहचान बनती जा रही है।
