पंजाब ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे आने वाले वर्षों में राज्य के औद्योगिक इतिहास का टर्निंग पॉइंट माना जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में शुरू हुआ फास्टट्रैक पंजाब पोर्टल का फेज-2 सिर्फ एक डिजिटल लॉन्च नहीं, बल्कि राज्य की नई आर्थिक सोच का ऐलान है।
उस दिन पंजाब के प्रशासनिक गलियारों में एक अलग ही हलचल थी। स्क्रीन पर उभरते आंकड़ों और नए इंटरफ़ेस के बीच एक ही संदेश था—निवेशकों का समय अब बर्बाद नहीं होगा, बल्कि सम्मानित होगा।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा मंच पर खड़े होकर जब यह घोषणा कर रहे थे कि “अब 15 विभागों की 173 Government-to-Business सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं”, तो उनके शब्द महज़ आंकड़े नहीं थे। वे यह दिखा रहे थे कि पंजाब अब पारंपरिक लालफीताशाही छोड़कर डिजिटल, तेज और पारदर्शी प्रशासन की ओर कदम बढ़ा चुका है।
देश में कोई भी ऐसा राज्य नहीं जहाँ इतनी बड़ी संख्या में निवेश सेवाएं एक प्लेटफॉर्म पर हों। और इसीलिए, कई विशेषज्ञों ने इस पोर्टल को इंडिया का सबसे निवेश-अनुकूल डिजिटल सिस्टम कहने में संकोच नहीं किया।
इस कहानी का दूसरा अहम अध्याय है — पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट (RTBA)।
इस कानून के जरिए भूमि आवंटन, निर्माण अनुमति, पर्यावरण मंजूरी जैसी दस महत्वपूर्ण स्वीकृतियों को पूरी तरह फास्ट-ट्रैक कर दिया गया है। यह वही मंजूरियां थीं जो पहले उद्योगपतियों को वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर कटवाती थीं।
अब तस्वीर बदल चुकी है।
सबसे क्रांतिकारी फैसला यह है कि स्वीकृत औद्योगिक पार्कों में पात्र परियोजनाओं को सिर्फ 5 कार्यदिवसों में सैद्धांतिक मंज़ूरी मिलेगी।
पांच दिन—एक ऐसा समय, जिसके सामने दुनिया के कई विकसित औद्योगिक क्षेत्र भी धीमे लगते हैं।
पंजाब सरकार यह दिखाना चाहती थी कि नौकरशाही उद्योग की बाधा नहीं, साझेदार भी बन सकती है। और इस पोर्टल ने इसी परिवर्तन की शुरुआत कर दी है।
गैर-RTBA मामलों में भी अधिकतम 45 कार्यदिवस की समय-सीमा तय कर दी गई है।
जहाँ पहले उद्योगपतियों को समय का कोई भरोसा नहीं होता था, वहीं अब एक कानूनी गारंटी है—समय पर काम होगा।
यह सुधार सिर्फ बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए नहीं है। छोटे-मध्यम उद्यमियों, माइक्रो यूनिट्स, और उभरते स्टार्टअप्स के लिए भी यह कदम नई रोशनी लेकर आया है।
जो युवा कभी व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकारी प्रक्रियाओं से डरते थे, वे अब डिजिटल मार्ग से आसानी के साथ आगे बढ़ सकेंगे।
कहानी का सबसे प्रेरक हिस्सा यह है कि यह पहल केवल आज के निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशक की आर्थिक संरचना गढ़ने के लिए की गई है।
एक छत के नीचे 173 सेवाओं का यह मॉडल सिर्फ पोर्टल नहीं—पंजाब के भविष्य का ब्लूप्रिंट है।
यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि यदि प्रशासन चाहे, तो औद्योगिक क्रांति कागजों से निकलकर जमीन पर उतर सकती है।
और पंजाब ने यह कर दिखाया है।
पंजाब के लिए यह पोर्टल एक नए युग का द्वार है—
एक ऐसा युग, जहाँ निवेशकों को प्रतीक्षा नहीं, स्वागत मिलेगा;
जहाँ उद्योग की गति फाइलों से नहीं, फैसलों से तय होगी;
और जहाँ विकास किसी नारे से नहीं, व्यवस्था से पैदा होगा।
