पंजाब में चंडीगढ़ को लेकर केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में लाए जा रहे प्रस्तावित बिल ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। राज्य की सभी प्रमुख पार्टियां इस बिल का कड़ा विरोध कर रही हैं और इसे पंजाब से चंडीगढ़ को दूर करने की “गहरी साज़िश” बताया जा रहा है। राजनीतिक दलों का कहना है कि यह कदम पंजाब के अधिकारों और संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है।
पंजाब BJP भी उतरी मैदान में, जाखड़ ने दी साफ प्रतिक्रिया
इन विरोधों के बीच पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ का महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। जाखड़ ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न और अलग न किए जा सकने वाला हिस्सा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब बीजेपी राज्य के हकों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है—फिर चाहे मुद्दा चंडीगढ़ का हो या पंजाब के पानी का।
“चंडीगढ़ पर बना भ्रम जल्द होगा दूर”: जाखड़
सुनील जाखड़ ने कहा कि चंडीगढ़ संबंधी बिल को लेकर जो “भ्रम की स्थिति” पैदा हुई है, उसे केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद ज़रूरी है, ताकि पंजाब के लोगों में कोई गलतफहमी न रहे और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जा सके।
पंजाब पहले, राजनीति बाद में—जाखड़ का संदेश
जाखड़ ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि एक पंजाबी होने के नाते उनके लिए पंजाब की भलाई सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि पंजाब बीजेपी हमेशा से राज्य के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी उसी तरह काम करती रहेगी।
अपने ट्वीट में जाखड़ ने लिखा—
“चंडीगढ़ पंजाब का अभिन्न हिस्सा है। पंजाब बीजेपी राज्य के हितों पर मजबूती से खड़ी है—चाहे मामला चंडीगढ़ का हो या पानी का। चंडीगढ़ को लेकर पैदा हुई भ्रम की स्थिति को केंद्र से बात कर दूर किया जाएगा। एक पंजाबी होने के नाते मैं विश्वास दिलाता हूं कि हमारे लिए पंजाब सबसे पहले है।”
विरोध के बीच नई राजनीतिक चर्चा को मिला बल
केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिल ने जहां पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, वहीं सुनील जाखड़ का यह बयान Punjab बीजेपी की स्थिति को स्पष्ट करता है। अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आएंगी, क्योंकि यह मामला पंजाब की संवेदनशीलता और भावनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है।
