पंजाब में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने आर्थिक स्वतंत्रता को केंद्र में रखकर नई पहल शुरू की है। ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ के जरिए लाखों महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
इस योजना के तहत राज्य की प्रत्येक पात्र महिला को ₹1,000 मासिक सहायता दी जा रही है, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह की राशि प्रदान की जा रही है। यह राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो रहा है।
सरकार का लक्ष्य इस योजना के तहत लगभग 90 लाख से 1 करोड़ महिलाओं को कवर करना है, जो राज्य की करीब 97% वयस्क महिला आबादी के बराबर है। इसके लिए वर्ष 2026-27 के बजट में ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो इस योजना के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2026 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में की गई, जबकि मई 2026 से इसे पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है। पात्र महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्रों और सेवा केंद्रों के माध्यम से आसानी से पंजीकरण कर सकती हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। नियमित आय मिलने से महिलाएं अब घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और छोटे व्यवसाय शुरू करने जैसे फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह योजना महिलाओं की सामाजिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है और उन्हें परिवार में निर्णय लेने की शक्ति दे रही है।
विशेष बात यह है कि इस योजना में एक परिवार की एक से अधिक महिलाएं भी लाभ उठा सकती हैं, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ गए हैं।
पंजाब सरकार की यह पहल नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। मासिक आर्थिक सहायता के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर राज्य “रंगला पंजाब” के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
