पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ ने अब दूसरे चरण में प्रवेश कर लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस फेज की शुरुआत करते हुए साफ कहा कि नशा सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसे मिल-जुलकर ही खत्म किया जा सकता है।
गांव स्तर पर मजबूत निगरानी व्यवस्था
दूसरे चरण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब यह मुहिम सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचेगी। करीब 1.5 लाख गांव-स्तरीय वालंटियर तैयार किए गए हैं, जिन्हें ‘पिंडां दे पहरेदार’ की भूमिका दी जाएगी। ये वालंटियर अपने-अपने गांवों में नशे की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और प्रशासन को जानकारी देंगे, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
सिर्फ पुलिस नहीं, इलाज और पुनर्वास पर भी फोकस
मान सरकार ने साफ किया है कि यह लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। नशा छोड़ने वालों के लिए डि-एडिक्शन, इलाज के बाद फॉलो-अप केयर और समाज में दोबारा सम्मान के साथ बसाने पर भी खास जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब तक नशे से बाहर आए लोगों को सही सहारा नहीं मिलेगा, तब तक समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
युवाओं को बचाने की खास रणनीति
इस अभियान में युवाओं को केंद्र में रखा गया है। स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे पहली बार नशे की ओर कदम न बढ़ाएं। खेल, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने की योजना भी बनाई गई है।
साझी जिम्मेदारी से नशा मुक्त पंजाब का लक्ष्य
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जब सरकार, समाज और युवा एक साथ खड़े होंगे, तभी नशा मुक्त पंजाब का सपना पूरा होगा। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ का दूसरा चरण इसी सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि हर गांव और हर परिवार को इस लड़ाई का हिस्सा बनाया जा सके।
