United States और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता सफल नहीं हो पाई, जिसके बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। एक-दूसरे पर बयानबाजी और जवाबी कदम तेज हो गए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।
होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा कारण
तनाव का सबसे बड़ा कारण Strait of Hormuz है, जो दुनिया के तेल सप्लाई का अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका की ओर से इस रूट पर सख्ती की बात कही गई है, वहीं ईरान ने भी तेल सप्लाई को लेकर चेतावनी दी है। अगर इस रास्ते पर रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
भारत की तैयारी: LPG सप्लाई मजबूत
इन हालातों के बीच भारत सरकार सतर्क हो गई है। देश में LPG की कमी न हो, इसके लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। खास तौर पर 5 किलोग्राम वाले छोटे LPG सिलेंडर की सप्लाई बढ़ाई गई है। हाल के दिनों में ऐसे 13 लाख से ज्यादा सिलेंडर बेचे जा चुके हैं और इनकी रोजाना बिक्री 1 लाख यूनिट से भी ऊपर पहुंच गई है। इससे गरीब और प्रवासी मजदूरों को राहत मिल रही है।
PNG कनेक्शन में तेजी
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। मार्च से अब तक 4.24 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इससे कई लोगों ने LPG पर निर्भरता कम करते हुए PNG अपनाना शुरू कर दिया है। करीब 30,000 उपभोक्ता अपने पुराने LPG कनेक्शन भी छोड़ चुके हैं।
संकट की आशंका बनी हुई
हालांकि भारत ने अपनी तैयारी मजबूत कर ली है, लेकिन वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होता है, तो तेल और गैस का संकट और गहरा सकता है। ऐसे में आने वाले समय में ऊर्जा बाजार पर नजर बनी रहेगी।
