नए साल की शुरुआत के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। बीते कुछ कारोबारी दिनों से बाजार पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसका सीधा असर बीएसई सेंसेक्स पर पड़ा है, जो लगातार गिरावट के साथ नीचे फिसलता चला गया। निवेशकों में इस गिरावट को लेकर चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
कितने अंक टूटा सेंसेक्स
पिछले लगभग 4 से 5 कारोबारी दिनों में सेंसेक्स में करीब 2,000 से 2,300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। एक समय सेंसेक्स जहां ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा था, वहीं अब यह कुछ ही दिनों में हजारों अंक नीचे आ गया। इस गिरावट ने बाजार की तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
निवेशकों की दौलत पर असर
सेंसेक्स में आई इस बड़ी गिरावट का सबसे ज्यादा असर निवेशकों की पूंजी पर पड़ा है। बाजार में आई कमजोरी के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में कई लाख करोड़ रुपये की कमी आंकी जा रही है। शेयरों के दाम गिरने से छोटे निवेशकों के साथ-साथ बड़े निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे हैं।
लगातार बिकवाली की वजह
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। कई निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिख रहे हैं, जिससे बाजार में खरीदारी कम रही।
किन सेक्टरों पर पड़ा ज्यादा दबाव
इस गिरावट के दौरान बैंकिंग, आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। बड़े शेयरों में गिरावट आने से सेंसेक्स पर दबाव और बढ़ गया। कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बना रहा।
बाजार का मौजूदा माहौल
फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है। निवेशक आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। सेंसेक्स का हालिया स्तर यह संकेत देता है कि बाजार में अभी स्थिरता आने में समय लग सकता है।
आगे क्या रह सकती है स्थिति
शेयर बाजार जानकारों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से बाजार की बुनियाद मजबूत बताई जा रही है। फिलहाल सेंसेक्स की गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि कुछ ही दिनों में बाजार का रुख कितनी तेजी से बदल सकता है।
पिछले कुछ दिनों में सेंसेक्स की करीब 2,000 अंकों से ज्यादा की गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर पड़ा है और सभी की नजरें अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर टिकी हुई हैं।
