अमृतसर की वर्ल्ड सिटी को पवित्र शहर घोषित किए जाने के बाद प्रशासन ने नियमों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पंजाब सरकार की अधिसूचना के तहत अब वर्ल्ड सिटी इलाके में चल रही मीट, मछली, तंबाकू और शराब से जुड़ी दुकानों को बाहर शिफ्ट किया जाएगा। इस प्रक्रिया को लेकर नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
इस संबंध में नगर निगम कार्यालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें नगर निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल की गाइडलाइंस के तहत आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जॉइंट कमिश्नर डॉ. जय इंदर सिंह ने की। इसमें नगर निगम के एस्टेट विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
पूरे इलाके का होगा सर्वे
बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि वर्ल्ड सिटी क्षेत्र में मौजूद सभी मीट, मछली, तंबाकू और शराब की दुकानों का विस्तृत सर्वे किया जाए। सर्वे के दौरान दुकानों की संख्या, उनका लाइसेंस, कारोबार की प्रकृति और सटीक लोकेशन की पूरी जानकारी इकट्ठा की जाएगी। इसके बाद इन दुकानों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार का मकसद पवित्रता बनाए रखना
मीडिया से बातचीत में जॉइंट कमिश्नर डॉ. जय इंदर सिंह ने बताया कि वर्ल्ड सिटी को पवित्र शहर घोषित करने का उद्देश्य इसके धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिसूचना जारी होने के बाद इस इलाके में मीट, मछली, तंबाकू और शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक है।
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड सिटी केवल अमृतसर का ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां ऐसी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे इलाके की पवित्रता प्रभावित हो।
दुकानदारों से सहयोग की अपील
प्रशासन की ओर से सभी दुकानदारों से अपील की गई है कि वे सरकार के फैसले का सम्मान करें और अपनी दुकानें स्वेच्छा से वर्ल्ड सिटी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि कोई दुकानदार नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जल्द तय होंगी शिफ्टिंग की तारीखें
अधिकारियों के अनुसार, सर्वे का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अगले चरण में दुकानों को शिफ्ट करने की तारीख, स्थान और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस फैसले से न सिर्फ वर्ल्ड सिटी की पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि अमृतसर की धार्मिक पहचान भी और मजबूत होगी।
