मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं और अब इसका असर दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक राहों में से एक—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज—पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खबरों के मुताबिक, ईरान ने इस जलसंधि से गुजरने वाले कुछ जहाजों से लगभग 2 मिलियन डॉलर (करीब 18.8 करोड़ रुपये) का टोल वसूलने का फैसला किया है।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरूजेर्दी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम ईरान की ताकत और इस क्षेत्र पर उसके प्रभाव को दिखाता है। उनके अनुसार, युद्ध जैसी स्थिति में बढ़ती लागत को देखते हुए यह फैसला जरूरी माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाना देश के अधिकार को दर्शाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। दुनिया भर के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव या रोक-टोक वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर ईरान इस जलसंधि को नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों पर कार्रवाई कर सकता है। इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि उस पर हमला किया गया, तो वह इस जलसंधि को पूरी तरह बंद कर सकता है।
ईरान का दावा है कि उसने इस रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया है, बल्कि अपने विरोधी देशों के अलावा अन्य देशों के जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए हुए हैं। हालांकि, लगातार बढ़ते हमलों और तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। कई तेल टैंकरों ने इस क्षेत्र से गुजरना कम कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर न सिर्फ तेल की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
