पंजाब का नाम सुनते ही खेती, हरियाली, खेलों और वीरता की पहचान सामने आती है। लेकिन पिछले कई दशकों से यह राज्य एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसने यहाँ की युवा पीढ़ी को खोखला कर दिया – नशे की लत। पंजाब के गाँवों से लेकर शहरों तक यह समस्या गहरी जड़ें जमा चुकी थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए नशे के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है।
नशे के जाल पर सीधी चोट
भगवंत मान सरकार ने साफ कर दिया है कि चाहे कितना भी बड़ा गिरोह क्यों न हो, नशा तस्करों को बख्शा नहीं जाएगा। बीते महीनों में पुलिस और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने बड़े स्तर पर अभियान चलाकर नशा सप्लाई करने वाले नेटवर्क को तोड़ने में सफलता पाई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में हजारों किलो हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं। साथ ही, सैकड़ों तस्करों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया है।
सरकार का यह भी मानना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होगी। इसलिए भगवंत मान ने नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों को भी जब्त करने का आदेश दिया है। इसका असर यह हुआ है कि जो लोग अब तक इस धंधे को मुनाफे का जरिया मानते थे, वे भी डरने लगे हैं।
इलाज और पुनर्वास पर ज़ोर
नशे से लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नशे के शिकार युवाओं को समाज की मुख्य धारा में लौटाना भी उतना ही ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने राज्य में नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि युवाओं को काउंसलिंग, मोटिवेशन और स्किल ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
सरकार की योजना है कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को रोज़गार और स्वरोज़गार से जोड़ा जाए। ताकि वे आत्मनिर्भर होकर एक नई जिंदगी शुरू कर सकें।
जनता से अपील और जनसहयोग
मुख्यमंत्री भगवंत मान बार-बार कह चुके हैं कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। वे लोगों से अपील करते हैं कि यदि किसी को नशा तस्करी या नशे से जुड़ी कोई जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को बताएं।
इस अपील का असर भी दिखने लगा है। कई सामाजिक संगठन और गांवों के नौजवान इस मुहिम से जुड़कर “नशामुक्त पंजाब” के अभियान को गति दे रहे हैं। कई जगहों पर ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर अपने गांवों में नशा करने वालों पर नज़र रखने और जागरूकता फैलाने की पहल शुरू की है।
उम्मीद की नई किरण
नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति और समाज दोनों के लिए सबसे गंभीर चुनौती रहा है। लेकिन जिस तरह से हाल के महीनों में सरकार ने लगातार कार्रवाई की है, उससे लोगों में एक नई उम्मीद जगी है। माता-पिता मानते हैं कि अगर यही सख़्ती और पुनर्वास की योजनाएं जारी रहीं, तो आने वाली पीढ़ियाँ नशे से बच सकेंगी।
भगवंत मान ने हाल ही में कहा – “पंजाब की धरती वीरों की धरती है। हम इसे नशे की धरती नहीं बनने देंगे। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, यह जंग हम हर हाल में जीतेंगे।”
पंजाब का हर नागरिक जानता है कि नशे से न केवल एक इंसान की ज़िंदगी बर्बाद होती है, बल्कि पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है। भगवंत मान सरकार की पहल अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन बन रही है। अगर जनता और सरकार मिलकर इस मुहिम को आगे बढ़ाते हैं, तो आने वाला समय पंजाब को फिर से वही पुराना गौरव दिला सकता है – मेहनतकश, खुशहाल और नशामुक्त पंजाब।
