पंजाब सरकार ने राज्य के नगर निगम कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें शीघ्र हल करने की दिशा में एक और ठोस कदम उठाया है। इस क्रम में सरकार द्वारा गठित कैबिनेट सब-कमेटी ने आज नगर निगमों की विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के साथ अहम बैठकें कीं, जिसमें उनकी मांगों और मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
इस बैठक की अध्यक्षता पंजाब के वित्त मंत्री और कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन हरपाल सिंह चीमा ने की। उनके साथ स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. रवजोत सिंह, पूर्व मंत्री एवं होशियारपुर के विधायक ब्रम शंकर जिम्पा तथा करतारपुर के विधायक बलकार सिंह भी शामिल हुए। प्रशासनिक स्तर से अतिरिक्त मुख्य सचिव तेजवीर सिंह और नगर निगम होशियारपुर की कमिश्नर ज्योति बाला मट्टू भी इस संवाद का हिस्सा बनीं।
बैठक के दौरान पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन और म्युनिसिपल मुलाजिम एक्शन कमेटी पंजाब के प्रतिनिधियों ने विस्तार से अपनी मांगों को प्रस्तुत किया। उन्होंने वेतन विसंगतियों, सेवा सुरक्षा, स्थायीकरण, प्रमोशन नीतियों और बकाया भत्तों जैसी समस्याओं को उठाया।
कैबिनेट सब-कमेटी ने बैठक के दौरान इन मुद्दों पर न केवल सहानुभूतिपूर्वक चर्चा की, बल्कि स्थानीय निकाय विभाग को सख्त निर्देश भी दिए कि वे इन समस्याओं का यथाशीघ्र और व्यवहारिक हल निकालें। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि पिछली बैठक के बाद यूनियनों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जो प्रगति हुई है, उसकी समीक्षा की जा रही है और सरकार इन पर पूरी संजीदगी से काम कर रही है।
चीमा ने यूनियन नेताओं को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह उनके साथ है और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार नगर निगमों के कर्मचारियों की भलाई के लिए वचनबद्ध है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी जायज़ मांगों का हल समयबद्ध तरीके से किया जाए।”
इस मौके पर म्युनिसिपल मुलाजिम एक्शन कमेटी की ओर से संयोजक रमेश कुमार, सरप्रस्त कुलवंत सिंह सैनी, सह-संयोजक गोपाल थापर और अशोक तारवाण ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं पंजाब सफाई मजदूर फेडरेशन की तरफ से अध्यक्ष नरेश कुमार, उपाध्यक्ष जुगिंदरपाल, चेयरमैन गोपाल कृष्ण, राकेश और राज हंस ने अपनी बात रखी।
सरकार और यूनियनों के बीच यह संवाद यह दर्शाता है कि राज्य सरकार कर्मचारियों के साथ सकारात्मक संवाद बनाकर उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इन बैठकों के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस बैठक ने कर्मचारी यूनियनों को आश्वासन दिया है कि सरकार सिर्फ सुन ही नहीं रही, बल्कि एक्शन मोड में है। पंजाब सरकार का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि कर्मचारी हित अब निर्णायक एजेंडा बन चुका है।
