आज पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक माता दुर्गा की पूजा-अर्चना और व्रत करने के बाद दशमी तिथि को यह पर्व अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीक बनकर सामने आता है।
हिंदू परंपरा में दशहरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अन्याय और अधर्म का अंत किया था। तभी से यह पर्व विजयादशमी कहलाया और हर वर्ष इसे बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
देशभर में आयोजन
देश के विभिन्न हिस्सों में आज सुबह से ही मंदिरों और रामलीला मैदानों में भीड़ देखने को मिली। दिल्ली के लालकिला मैदान में होने वाली ऐतिहासिक रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। शाम को यहाँ रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाएगा।
वाराणसी, अयोध्या, लखनऊ, जयपुर और कोलकाता जैसे शहरों में भी दशहरा पर्व पर विशेष आयोजन हो रहे हैं। अयोध्या में सरयू तट पर आकर्षक रामलीला मंचन किया गया, वहीं वाराणसी में गंगा तट पर विशाल झाँकियाँ निकाली गईं।
रावण दहन की परंपरा
दशहरा का सबसे बड़ा आकर्षण है रावण दहन। शाम होते ही जगह-जगह बड़े-बड़े मैदानों में रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। आतिशबाज़ी और पटाखों की गूंज से पूरा माहौल गूँज उठेगा। यह दृश्य अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
दशहरा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। इस दिन लोग परिवार और मित्रों के साथ मिलकर पर्व का आनंद लेते हैं। छोटे बच्चों को राम और रावण की कहानियाँ सुनाई जाती हैं ताकि वे जीवन में सत्य और धर्म का महत्व समझ सकें।
भारत के कई हिस्सों में इस दिन शस्त्र पूजन और वाहन पूजन की भी परंपरा है। लोग अपने घर, दुकान और दफ्तर में नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ मानते हैं। किसानों के लिए यह समय नई फसल की शुरुआत का भी संकेत होता है।
विशेष आकर्षण
दशहरे पर मेले और झूले भी लोगों को खूब आकर्षित करते हैं। मिठाई और खानपान की दुकानों पर भारी भीड़ रहती है। बच्चों के लिए यह पर्व खेल और उत्सव का आनंद लेकर आता है, जबकि बुजुर्ग इसे संस्कृति और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर मानते हैं।
आज का दिन केवल एक पर्व ही नहीं, बल्कि एक संदेश है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, सत्य और अच्छाई की ही जीत होती है। रावण दहन का दृश्य हमें यही याद दिलाता है कि बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंततः उसका नाश निश्चित है।
पूरे देश में आज का दिन उल्लास और उमंग से भरा हुआ है। मंदिरों की घंटियाँ, रामलीला के मंचन और आतिशबाज़ी के बीच दशहरा का पर्व लोगों के दिलों में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार कर रहा है।
