भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने आबकारी क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त, योजना, आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने नई आबकारी नीति की घोषणा करते हुए कहा कि इन सुधारों ने राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसका सीधा लाभ स्कूलों, अस्पतालों और जनकल्याणकारी योजनाओं को मिल रहा है।
मंत्री ने बताया कि 2011-12 में अकाली-भाजपा शासन के दौरान आबकारी राजस्व मात्र 2,755 करोड़ रुपये था, जबकि 2021-22 में कांग्रेस सरकार के समय यह 6,255 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका। लेकिन 2022- 23 में नई नीतिगत व्यवस्था लागू होने के बाद राजस्व 8,428 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी जारी रही और 2024-25 में 10,744 करोड़ रुपये तथा 2025-26 में 11,200 करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में राज्य आगे बढ़ चुका है।
नई नीति के तहत 2025-26 की फीस में 6.5% वृद्धि के साथ मौजूदा रिटेल लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाएगा। जहां नवीनीकरण नहीं होगा, वहां पारदर्शी ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 50 और 65 डिग्री पंजाब मीडियम लीकर (PML) का कोटा 3% बढ़ाकर 8.79 करोड़ प्रूफ लीटर किया गया है। अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए उच्च अपराध क्षेत्रों में 40 डिग्री PML सब-वेंड शुरू किए जाएंगे।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देते हुए ई. डी. पी. और ई.बी. पी. ब्रांड कीमतों में 4% तक की वृद्धि को ऑटो-स्वीकृति प्रक्रिया के तहत लाया गया है, जिससे दफ्तरों की देरी कम होगी। साथ ही, माल्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों को प्रोत्साहन देकर पंजाब को केवल बॉटलिंग राज्य से उत्पादन हब में बदलने की दिशा में कदम उठाया गया है। इससे जौं की प्रोसेसिंग से लेकर प्रीमियम माल्ट उत्पादन तक का पूरा चक्र राज्य में विकसित होगा और कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
सरकार ने अवैध तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए 1,106 एफआईआर दर्ज कीं, 4,324 गिरफ्तारियां कीं और लाखों लीटर अवैध शराब व लाहन नष्ट की। यह कदम राजस्व वृद्धि के साथ-साथ जन सुरक्षा और पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
