अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन कर दिया है, जिसके तहत TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की अनुमति दी गई है। लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच यह विवाद गहराता जा रहा था। अमेरिकी प्रशासन का आरोप था कि टिकटॉक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और चीन सरकार यूजर्स का डेटा इस्तेमाल कर सकती है।
14 अरब डॉलर की डील
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि TikTok US की वैल्यू 14 अरब डॉलर तय की गई है। इस एक्जीक्यूटिव ऑर्डर से फिलहाल टिकटॉक पर बैन टल गया है। ऑर्डर के जरिए अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को वह कानून लागू करने से रोका गया है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को अमेरिका में बैन किया जाना था।
नया मालिक कौन होगा?
डील के मुताबिक TikTok US अब नया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स नियुक्त करेगा। एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन सिस्टम, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन अब नए मालिकों के हाथ में होंगे। Oracle कंपनी सुरक्षा ऑपरेशन्स और क्लाउड सर्विसेज को संभालेगी। वहीं Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45% हिस्सेदारी खरीदेंगे। इससे टिकटॉक का पूरा नियंत्रण अमेरिकी कंपनियों के पास आ जाएगा।
चीन की ओर से शुरुआती विरोध
जेडी वेंस ने बताया कि शुरू में चीन की ओर से कुछ आपत्ति जताई गई थी, लेकिन बाद में बातचीत से रास्ता निकल गया। ट्रंप का कहना है कि उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत हुई और उन्होंने इस डील को हरी झंडी दे दी। ट्रंप ने कहा – “मैंने शी जिनपिंग को बताया कि हम ये कदम उठाने जा रहे हैं और उन्होंने हामी भर दी।”
अब पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण
ट्रंप ने साफ कहा कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका के हाथों में होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए मालिक इस बात का ध्यान रखेंगे कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी तरह के प्रोपेगेंडा या गलत सूचना फैलाने में न हो।
बाइटडांस का रुख
हालांकि, ByteDance ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कंपनी ने पहले सिर्फ इतना कहा था कि वे अमेरिका में टिकटॉक को बनाए रखने के लिए सभी नियमों का पालन करेंगे।
यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
इस बड़े बदलाव का असर अमेरिकी यूजर्स पर तुरंत तो नहीं दिखेगा। टिकटॉक ऐप पहले की तरह उपलब्ध रहेगा, लेकिन अब इसके ऑपरेशन, कंटेंट मॉडरेशन और डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी कंपनियों के पास होगी। इससे सरकार को भरोसा है कि यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहेगा और चीन के प्रभाव को रोका जा सकेगा।
