लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में राजनीतिक हालात उस वक्त और गंभीर हो गए, जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिकी हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के बाद वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्तों में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। वेनेजुएला सरकार ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर हमला बताया है।
ट्रंप का कड़ा बयान
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला को अब वही चला रहे हैं। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अंतरिम सरकार अमेरिका का सहयोग नहीं करती, तो वह कार्रवाई के अगले दौर से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके बयान से यह साफ हो गया कि अमेरिका इस मामले में और दबाव बनाने के मूड में है।
वेनेजुएला का जवाब: शांति और संप्रभुता
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका देश शांति चाहता है और किसी भी बाहरी ताकत के अधीन नहीं है। उन्होंने मांग की कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को तुरंत रिहा कर वेनेजुएला लौटाया जाए। रोड्रिग्ज ने कहा, “यह कोई युद्ध नहीं है, हम पर हमला किया गया है,” और जोर दिया कि देश की सुरक्षा और निगरानी सरकार खुद कर रही है।
हमले में हताहतों पर सस्पेंस
वेनेजुएला सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिकी सैन्य हमले में कितने लोग मारे गए या घायल हुए। अधिकारियों के मुताबिक, मौतों और नुकसान के आंकड़ों की जांच के लिए एक विशेष आयोग बनाया जाएगा। इस बीच क्यूबा सरकार ने दावा किया कि उनके 32 नागरिक भी इस हमले में मारे गए हैं और इसके चलते क्यूबा में दो दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।
राष्ट्रीय शोक की घोषणा
डेल्सी रोड्रिग्ज ने काराकस में हुए सैन्य हमले में मारे गए लोगों की याद में वेनेजुएला में सात दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ये जवान देश और राष्ट्रपति मादुरो की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं और उनकी कुर्बानी को सम्मान देना जरूरी है।
अमेरिका में भी बंटी राय
मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका में भी एक जैसी राय नहीं है। वॉशिंगटन पोस्ट और SSRS के सर्वे के मुताबिक, 40 फीसदी अमेरिकी नागरिक इस गिरफ्तारी को सही मानते हैं, जबकि 45 फीसदी इसे गलत ठहराते हैं। करीब 20 फीसदी लोग अभी भी असमंजस में हैं।
मादुरो को अमेरिका ले जाने के बाद ड्रग तस्करी से जुड़े मामले में अदालत में पेश किया गया है। उनकी अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है। इस सुनवाई पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर न सिर्फ वेनेजुएला की राजनीति, बल्कि अमेरिका-लैटिन अमेरिका संबंधों पर भी पड़ेगा।
