रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज, 4 नवंबर, दो दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। इस यात्रा को भारत–रूस संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, और दोनों देशों के रिश्ते पिछले कई सालों के सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं।
आज शाम नई दिल्ली पहुंचेंगे पुतिन
पुतिन के आज शाम लगभग साढ़े चार बजे नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। माना जा रहा है कि इस डिनर के दौरान दोनों नेता कई अहम मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी करेंगे।
शुक्रवार को होगी उच्च-स्तरीय शिखर वार्ता
यात्रा का सबसे अहम हिस्सा शुक्रवार को होने वाली भारत–रूस शिखर बैठक होगी। यह वार्ता रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक राजनीति जैसे प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। सूत्रों के अनुसार:
- दोनों देश रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर देंगे।
- द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने के उपाय तलाशे जाएंगे।
- परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर पर साझेदारी को लेकर चर्चा हो सकती है।
पश्चिमी देश इस बैठक पर विशेष नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि वैश्विक माहौल इन दिनों तनावपूर्ण है और भारत–रूस सहयोग कई देशों की निगाह में आता है।
भारत–अमेरिका तनाव के बीच यह यात्रा अहम क्यों?
हाल के दिनों में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर भारी शुल्क लगा दिया है। कई भारतीय उत्पादों पर 50% तक का आयात शुल्क लगाया गया है। इसके अलावा रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर भी अमेरिका ने 25% अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया है।
इन फैसलों के चलते भारत–अमेरिका संबंध दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे समय में रूस के साथ मजबूत संवाद भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तर पर बेहद आवश्यक माना जा रहा है।
भारत–रूस साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच भरोसे को और गहरा करेगी। रूस भारत का पुराना और विश्वसनीय साझेदार रहा है। चाहे रक्षा क्षेत्र हो, ऊर्जा हो या अंतरिक्ष—भारत और रूस लंबे समय से एक-दूसरे का साथ निभाते रहे हैं।
इस दौरे से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच:
- व्यापार को नई दिशा मिलेगी
- रक्षा परियोजनाएँ आगे बढ़ेंगी
- ऊर्जा क्षेत्र में नई साझेदारियाँ बन सकती हैं
28 घंटे का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण दौरा
पुतिन का यह दौरा लगभग 28 घंटे का होगा। शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे वे भारत से वापस रवाना हो जाएंगे। हालांकि समय कम है, लेकिन इस दौरान होने वाली चर्चाएँ आने वाले कई वर्षों तक भारत–रूस संबंधों पर गहरा असर डाल सकती हैं।
