पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने की। सरकार का साफ संदेश है कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।
फेज-2 में जनता की सीधी भागीदारी
अभियान के दूसरे चरण में सरकार पहली बार गांव-गांव तक जनता को सीधे जोड़ रही है। 10 से 25 जनवरी के बीच पूरे पंजाब में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इसके साथ ही विलेज डिफेंस कमेटियां (VDC) बनाई गई हैं, जिनसे अब तक करीब डेढ़ लाख वालंटियर जुड़ चुके हैं। इन्हें ‘पिंड दे पहरेदार’ नाम दिया गया है। ये वालंटियर अपने-अपने गांवों में नशा बेचने वालों की जानकारी एक खास मोबाइल ऐप के जरिए देंगे। जानकारी देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और हर शिकायत की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होगी।
फेज-1 की सख्त कार्रवाई से बदला माहौल
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि फेज-1 में बीते करीब डेढ़ साल में 28 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और 42 हजार से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 350 बड़े तस्कर भी शामिल हैं। पहली बार नशा तस्करों की अवैध कोठियों और संपत्तियों पर बुलडोजर चला, जिससे आम लोगों में भरोसा पैदा हुआ कि सरकार वाकई गंभीर है।
नशा करने वाले अपराधी नहीं, मरीज
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि नशा करने वालों को अपराधी नहीं बल्कि इलाज के जरूरतमंद मरीज समझा जाए। सरकार ने नशा मुक्ति और ओएसटी सेंटर्स की हालत बदली है। जहां पहले करीब 1500 बेड थे, अब उनकी संख्या बढ़ाकर 5000 कर दी गई है। बेहतर इलाज, साफ-सफाई और सुविधाओं से अब लोग खुद इलाज के लिए आगे आ रहे हैं।
सीमा सुरक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पंजाब में नशे की बड़ी खेप पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए आती है। इसी वजह से पहली बार पंजाब सरकार ने अपने फंड से एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदे, ताकि केंद्र पर निर्भर रहे बिना नशे की सप्लाई रोकी जा सके।
एक सामाजिक आंदोलन की ओर
सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ यह अभियान तभी सफल होगा, जब हर नागरिक पहरेदार बने। 13 फरवरी को सभी पिंड दे पहरेदारों की एक बड़ी राज्य स्तरीय बैठक होगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भरोसा जताया कि जिस तरह फेज-1 में सफलता मिली, उससे भी कम समय में फेज-2 अपने लक्ष्य हासिल करेगा।
‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अब एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य को बचाने का जन-आंदोलन बन चुका है।
