नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी घाटी में आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तेज बहाव में पानी के साथ बर्फ, चट्टानें, कीचड़ और भारी मलबा नीचे की ओर आया, जिससे गांवों, सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
आखिर क्या है GLOF?
इस घटना के बीच GLOF यानी Glacial Lake Outburst Flood चर्चा में है। आसान भाषा में समझें तो पहाड़ों पर ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी कई बार ग्लेशियर के पास बनी झील में जमा होता रहता है। इस झील को अक्सर बर्फ, मिट्टी और पत्थरों से बनी प्राकृतिक दीवार रोककर रखती है। इस दीवार को मोरेन कहा जाता है।
अगर किसी वजह से यह प्राकृतिक दीवार टूट जाए, तो झील का जमा पानी अचानक बहुत तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है। इसी घटना को GLOF कहा जाता है।
पानी के साथ आती है चट्टानों और मलबे की ताकत
GLOF को सामान्य बाढ़ से ज्यादा खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें केवल पानी नहीं बहता। तेज धारा अपने साथ बड़े पत्थर, बर्फ, मिट्टी और कीचड़ भी लेकर आती है। पहाड़ी इलाकों में ढलान तेज होने के कारण यह मलबा बेहद तेजी से नीचे पहुंच सकता है और रास्ते में आने वाले पुल, सड़क, मकान और दूसरे ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
कैसे टूट सकती है ग्लेशियर झील की दीवार?
GLOF के पीछे कई कारण हो सकते हैं। झील में पानी का दबाव लगातार बढ़ने से मोरेन कमजोर हो सकती है। इसके अलावा ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा या चट्टान झील में गिर जाए तो अचानक ऊंची लहर पैदा हो सकती है, जो प्राकृतिक बांध को तोड़ दे। भारी बारिश भी पानी का स्तर बढ़ाकर खतरा बढ़ा सकती है। हिमालय भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, इसलिए भूकंप के झटके भी कमजोर संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।
नेपाल की घटना में क्या सामने आया?
नेपाल की मौजूदा बाढ़ के कारण को लेकर शुरुआती जांच में अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से ल्हेंदे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आने की बात सामने आई है। वहीं प्रारंभिक आकलनों में भोटेकोशी नदी के ऊपर मलबे से अस्थायी जलाशय बनने और फिर उसके टूटने की संभावना भी बताई गई है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरा
हिमालय में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और पीछे हटने से ग्लेशियर झीलों का आकार बढ़ सकता है। ABP की रिपोर्ट में ICIMOD के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की गति लंबे समय से बढ़ रही है। बड़ी होती झीलें भविष्य में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती हैं।
नेपाल में कई झीलें संवेदनशील
नेपाल सरकार और ICIMOD के आकलनों के अनुसार नेपाल में 47 ग्लेशियल झीलों को संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। इनमें से कई झीलें पूर्वी और मध्य नेपाल के नदी बेसिनों के आसपास स्थित हैं, जहां अचानक बाढ़ आने पर नीचे बसे इलाकों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
खतरे को पहले पहचानना क्यों जरूरी
विशेषज्ञ संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की लगातार निगरानी, सैटेलाइट तकनीक और रियल-टाइम सेंसर आधारित चेतावनी व्यवस्था पर जोर देते हैं। समय रहते झील के जलस्तर में बदलाव का पता चल जाए तो नीचे की ओर बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का समय मिल सकता है।
