भारत के राष्ट्रपति ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए 10 नए अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 224(1) के तहत लिया गया है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य न्यायपालिका को और मजबूत बनाना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।
इन न्यायाधीशों का कार्यकाल दो वर्षों का होगा, जो उस दिन से शुरू होगा जब वे अपने पद का कार्यभार संभालेंगे। सभी जजों की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर की गई है।
नए नियुक्त अतिरिक्त न्यायाधीशों के नाम इस प्रकार हैं:
- श्री विरिंदर अग्रवाल
- सुश्री मंदीप पाल्म
- श्री अमरिंदर सिंह ग्रेवाल
- श्री प्रमोद गोयल
- सुश्री रुपिंदरजीत चहल
- सुश्री शालिनी सिंह नागपाल
- श्री सुभाष मेहला
- श्री सूर्य प्रताप सिंह
- सुश्री आराधना साहनी
- श्री यशवीर सिंह राठौर
इनमें कई न्यायाधीश पहले ही न्यायिक सेवा में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और कानून के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। कुछ नाम महिला न्यायाधीशों के भी हैं, जो न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन की दिशा में एक अच्छा संकेत है।
इस निर्णय से हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या को कम करने में मदद मिलेगी और जनता को जल्दी न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में केसों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाना एक स्वागत योग्य कदम है।
केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद यह नियुक्तियां की गई हैं। इससे पहले भी समय-समय पर जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती रही है।
यह कदम न सिर्फ न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, बल्कि लोगों के भरोसे को भी मजबूत करेगा। उम्मीद की जा रही है कि ये नए जज अपने अनुभव और ज्ञान से न्याय प्रणाली में नया जोश भरेंगे और समाज में न्याय की भावना को और अधिक मजबूत करेंगे।
