पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम लगातार तेज होती जा रही है। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के 129वें दिन, पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में एक बार फिर से सख्त कार्रवाई की। इस बार राज्यभर के 180 बस अड्डों पर घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया गया।
यह विशेष अभियान पंजाब के सभी 28 पुलिस जिलों में एक साथ चलाया गया। इस कार्रवाई की निगरानी स्वयं स्पेशल डीजीपी (कानून व्यवस्था) अरपित शुक्ला ने की। उन्होंने बताया कि बस अड्डों पर पहुंचने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की गहन जांच की गई।
छापेमारी और गिरफ्तारी
पुलिस टीमों ने सिर्फ बस अड्डों तक ही सीमित नहीं रहकर पूरे राज्य में कुल 458 स्थानों पर छापेमारी की। इन छापों के दौरान 84 एफआईआर दर्ज की गईं और 111 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई के बाद अब तक इस अभियान में पकड़े गए कुल तस्करों की संख्या 21,026 हो चुकी है, जो दर्शाता है कि पुलिस की कार्रवाई कितनी व्यापक और लगातार चल रही है।
नशा और नकदी की बरामदगी
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में नशा और नकदी बरामद की है:
- 41.3 किलो हेरोइन
- 1.7 किलो अफीम
- ₹23,980 की ड्रग मनी
ये बरामदगी साफ तौर पर दर्शाती है कि नशा तस्करी का जाल अब भी फैला हुआ है, लेकिन पुलिस इसे खत्म करने के लिए लगातार मेहनत कर रही है।
जेलों में भी चला तलाशी अभियान
इस विशेष दिन पर पुलिस ने न केवल सड़कों और अड्डों पर नजर रखी, बल्कि बठिंडा, मानसा, बरनाला, पटियाला, संगरूर और मोहाली की विभिन्न जेलों में भी तलाशी अभियान चलाया गया। इसका मकसद जेलों में मौजूद नेटवर्क को भी तोड़ना था, जो अक्सर बाहर के तस्करों से संपर्क में रहते हैं।
विशेष निगरानी और रणनीति
डीजीपी अरपित शुक्ला ने बताया कि यह कार्रवाई अचानक और बिना किसी पूर्व जानकारी के की जाती है, ताकि नशा तस्कर सतर्क न हो सकें। इस तरह की मुहिम आगे भी नियमित रूप से चलती रहेंगी, ताकि नशे के खिलाफ अभियान को निर्णायक मोड़ पर लाया जा सके।
पंजाब पुलिस की यह मुहिम दिखाती है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन नशा मुक्त पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। लगातार हो रही गिरफ्तारियों और बरामदियों से साफ है कि प्रशासन नशा तस्करी को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है।
लोगों को भी पुलिस का सहयोग करना चाहिए और नशे के खिलाफ इस जंग में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए, ताकि पंजाब को एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज बनाया जा सके।
