देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की सरकारी योजना के बीच एक नए सर्वे ने वाहन बाजार से जुड़ी दिलचस्प तस्वीर पेश की है। सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग E20 और भविष्य में E30 ईंधन को लेकर स्पष्ट जानकारी न होने के कारण नई गाड़ी खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। 28 हजार से अधिक संभावित खरीदारों पर किए गए इस सर्वे में 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अगले एक साल में वाहन खरीदने का निर्णय टाल सकते हैं या दोबारा विचार कर सकते हैं।
आखिर क्या है E20 और E30 ईंधन?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल होता है। वहीं E30 में एथेनॉल की मात्रा 30 प्रतिशत तक हो सकती है। सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ सके। हाल ही में E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को भी प्रोत्साहन देने के कदम उठाए गए हैं।
वाहन मालिकों को किस बात की चिंता?
कई संभावित खरीदारों का मानना है कि भविष्य में ईंधन मानकों में बदलाव होने पर उनकी नई गाड़ी पूरी तरह अनुकूल होगी या नहीं, इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। कुछ लोगों को माइलेज पर असर पड़ने की चिंता भी सता रही है। इसी वजह से कई खरीदार फिलहाल इंतजार करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
पेट्रोल कारों की मांग में दिख रहा बदलाव
सर्वे में सामने आया कि केवल 6 प्रतिशत लोगों ने अगले 12 महीनों में नई पेट्रोल कार खरीदने की इच्छा जताई। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों में लोगों की रुचि बढ़ती दिखाई दे रही है। 7 प्रतिशत लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहन और 7 प्रतिशत ने हाइब्रिड वाहन खरीदने की बात कही। यानी दोनों को मिलाकर 14 प्रतिशत खरीदार वैकल्पिक तकनीक की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
सरकार और उद्योग की नजर आगे की रणनीति पर
सरकार एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य हासिल करना चाहती है। दूसरी ओर वाहन उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा जारी है कि भविष्य में E25 या E30 जैसे ईंधनों का उपयोग किस तरह बढ़ेगा। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सरकार उच्च एथेनॉल मिश्रण को अनिवार्य बनाने की बजाय उपभोक्ताओं को विकल्प देने पर भी विचार कर सकती है।
ऑटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण संकेत
भारत का ऑटोमोबाइल बाजार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ईंधन से जुड़ी अनिश्चितता उपभोक्ताओं के फैसलों को प्रभावित करती दिखाई दे रही है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि लोग नई तकनीक और बदलती ईंधन नीति को समझने के बाद ही बड़ा निवेश करना चाहते हैं। यही कारण है कि E20 और E30 को लेकर चल रही चर्चा अब वाहन उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
