पंजाब में आमदन से ज़्यादा संपत्ति मामले में गिरफ़्तार हुए शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनका चार दिन का रिमांड 6 जुलाई को खत्म हुआ, जिसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें मोहाली अदालत में पेश किया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए मजीठिया को नवीन नाभा जेल भेजने के आदेश दिए। हालांकि विजिलेंस ने और रिमांड की मांग की थी, लेकिन मजीठिया के वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। अब अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।
फिर से रिमांड लिया जा सकता है
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अभी ये संकेत दिए हैं कि अगर जांच में जरूरत पड़ी, तो वे मजीठिया का तीन दिन का और रिमांड मांग सकते हैं। यानि उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए अदालत में लाया जा सकता है। वर्तमान में मजीठिया 26 जून से विजिलेंस की हिरासत में थे, और इस दौरान उनसे इस केस से जुड़े कई पहलुओं पर पूछताछ की गई।
अदालत के बाहर तनाव का माहौल
मजीठिया की पेशी से पहले मोहाली अदालत परिसर के बाहर शिरोमणि अकाली दल के कई नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। जैसे ही पुलिस ने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम शुरू किए, वहाँ हलचल बढ़ गई। इस दौरान अकाली कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने कार्यकर्ताओं को बसों में बैठाकर मौके से हटा दिया।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़
इस मामले को लेकर अकाली दल की ओर से सरकार पर निशाना साधा गया है। पार्टी के नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को बिक्रम मजीठिया पसंद नहीं हैं, इसलिए उन्हें मीडिया से दूर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब राजनीतिक बदले की भावना से हो रहा है।
बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी और अब न्यायिक हिरासत में भेजा जाना पंजाब की राजनीति में हलचल मचा रहा है। अब सबकी निगाहें 19 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ पता चलेगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। वहीं, अकाली दल इस पूरे मामले को सियासी साज़िश बता रहा है।
