सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 से 800 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,100 के आसपास फिसल गया। निवेशकों के बीच बढ़ती वैश्विक चिंताओं ने बाजार का माहौल कमजोर कर दिया।
ईरान-इजरायल तनाव बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है। ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली का माहौल देखने को मिला, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी जोरदार बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई। निवेशकों को डर है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा तेल भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय माना जाता है।
एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के कई बड़े शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य एशियाई बाजारों में निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की। वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता ने जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया, जिसके कारण शेयरों में दबाव बढ़ा।
किन सेक्टरों पर पड़ा ज्यादा असर
भारतीय बाजार में आईटी, ऑटो, रियल्टी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर जैसे कुछ रक्षात्मक सेक्टरों में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखी गई।
रुपये पर भी बढ़ा दबाव
शेयर बाजार में गिरावट के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव दिखाई दिया। बढ़ती तेल कीमतों और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के कारण रुपये में कमजोरी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात और तेल की कीमतें आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर में बनी रहेंगी।
