जून 2025 में भारत में सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल की तुलना में बिक्री 60% घटकर सिर्फ 35 टन पर पहुँच गई, जो कि कोविड के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। यह जानकारी इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा दी गई है।
महंगाई और अस्थिरता ने रोकी खरीदी
IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने बताया कि इस भारी गिरावट का मुख्य कारण सोने की ऊँची और लगातार बदलती कीमतें हैं। ग्राहक इस अनिश्चित माहौल में सोना खरीदने से बच रहे हैं। कई ग्राहकों को डर है कि आज महँगा खरीदकर कल नुकसान न हो जाए।
उत्पादन भी घटा, छोटे कारोबारियों को झटका
मांग में गिरावट के साथ-साथ गहनों का उत्पादन भी आधे से ज्यादा घट गया है। देशभर में हजारों ज्वैलरी वर्कशॉप्स ने काम कम कर दिया है। खासतौर पर छोटे कारीगर और खुदरा विक्रेता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सुरेंद्र मेहता ने बताया कि डिस्काउंट देने के बावजूद भी ग्राहक नहीं लौट रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कारणों से भी बढ़ी कीमतें
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा EU और मैक्सिको पर टैरिफ (शुल्क) लगाने की धमकी ने वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा दिया है। इस वजह से दुनियाभर के निवेशक अब शेयर बाजार छोड़कर सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
हॉलमार्किंग में बदलाव की तैयारी
IBJA ने हाल ही में 9 कैरेट सोने की हॉलमार्किंग को लेकर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से बात की है। BIS ने इसका मॉडल तैयार कर लिया है और उम्मीद है कि जल्द इसे मंजूरी मिल जाएगी। इससे कम कैरेट के गहनों का बाजार भी पारदर्शी बनेगा।
14 कैरेट सोने की मांग में तेजी
महंगे होते सोने की वजह से अब ग्राहक 22 कैरेट गहनों की बजाय 14 कैरेट के गहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ये गहने न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि वजन में भी हल्के होते हैं, जिससे वे आम लोगों के बजट में फिट बैठते हैं। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा है कि हल्के गहनों की मांग आने वाले समय में और बढ़ेगी।
भविष्य की उम्मीदें
हालांकि फिलहाल बाजार में सुस्ती है, लेकिन विशेषज्ञों को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन या शादियों के मौसम में सोने की मांग फिर से उठ सकती है। साथ ही, सरकार और उद्योग संगठनों की कोशिश है कि कम कैरेट और हॉलमार्किंग सुधारों के ज़रिए गहनों को आम जनता की पहुँच में लाया जाए।
सोने की बिक्री में भारी गिरावट उद्योग के लिए चिंता का विषय है, लेकिन इससे एक नई प्रवृत्ति भी उभर रही है—कम कैरेट और हल्के गहनों की ओर रुझान। अगर कीमतें स्थिर होती हैं और भरोसा लौटता है, तो बाजार में सुधार की पूरी संभावना है।
