गुरु नानक देव जी की पवित्र धरती पर, जहां पहली बार मूल मंत्र का उच्चारण हुआ था, वहां एक नई पुकार गूंज उठी — इस बार धरती को, पानी को और हवा को बचाने के लिए। काली बेईं की सफाई के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने गुरबाणी की एक पंक्ति उद्धृत की:
“पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत।”
उन्होंने कहा, “गुरु साहिब ने जिन तत्वों को माता-पिता और गुरु का दर्जा दिया, हम उन्हीं को प्रदूषित कर बैठे हैं। अब समय आ गया है कि हम उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करें और पंजाब की धरती को फिर से पवित्र बनाएं।”
काली बेईं की गाथा: सेवा से शुद्धि तक
2000 में संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा शुरू की गई कर सेवा ने वह कर दिखाया जिसे कोई सरकारी मशीनरी नहीं कर सकी थी। 165 किलोमीटर लंबी काली बेईं नदी, जो कभी कचरे और गंदगी से भरी थी, आज पंजाब की पर्यावरणीय पुनरुद्धार की मिसाल बन गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस महान कार्य को इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।” उन्होंने राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल की सराहना की, जो अब भी नदियों की रक्षा के लिए संसद और ज़मीन पर सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि अगला लक्ष्य है बुद्धा दरीया (पहले बुद्धा नाला) को साफ करना — “हम जल्द ही इसे उसकी पुरानी पवित्र स्थिति में वापस लाएंगे।”

खेतों में पानी पहुंचा रही है सरकार
पंजाब भले ही नदियों की भूमि कहलाता हो, पर आज वह गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री मान ने बताया कि जब उन्होंने पदभार संभाला, सिर्फ 21% नहरों का पानी सिंचाई में इस्तेमाल हो रहा था, पर आज यह आंकड़ा 63% तक पहुंच गया है।
अब तक राज्य में 15,947 जल चैनलों को पुनर्जीवित किया जा चुका है, जिससे दूर-दराज़ के गांवों तक पानी पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे एक जन आंदोलन बनाने की अपील की और कहा, “सरकार अकेले नहीं कर सकती, इसमें हर पंजाबी को भागीदारी निभानी होगी।”
सेहत और नशा-मुक्ति पर भी बड़ा फोकस
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सेहत योजना को देश की पहली ऐसी योजना बताया जो हर परिवार को ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाती है। उन्होंने कहा, “पंजाब पहला राज्य है जो हर घर को संपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा दे रहा है।”
साथ ही, नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशे दे विरुद्ध’ के तहत नशा तस्करों की संपत्तियों की जब्ती, आरोपियों की गिरफ्तारी, और पीड़ितों का पुनर्वास हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई गांव अब ‘नशा-मुक्त ग्राम’ घोषित किए जा चुके हैं।
बेअदबी पर सख्ती, एक मजबूत संदेश
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब गुरुओं और संतों की धरती है, लेकिन कुछ विरोधी ताकतें 2016 से धर्मग्रंथों की बेअदबी के ज़रिए राज्य की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने घोषणा की कि पंजाब धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराध निवारण विधेयक, 2025 विधानसभा में पेश किया गया है। इसके तहत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है ताकि ऐसे कृत्य दोबारा न हो सकें।
सुल्तानपुर लोधी का सर्वांगीण विकास
गुरु नानक देव जी की स्मृति से जुड़े सुल्तानपुर लोधी शहर के लिए करोड़ों की विकास योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रोजेक्ट जल्द ही पूरे होंगे और धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय विकास को भी गति देंगे।
काली बेईं की वर्षगांठ: सिर्फ उत्सव नहीं, एक संदेश
मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि यह समारोह केवल धार्मिक अनुष्ठान या प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य है — पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागृति फैलाना।
“प्राकृतिक संसाधन कोई विरासत नहीं, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी हैं,” उन्होंने कहा। “आइए, हम सब मिलकर इसे एक जन आंदोलन बनाएं।”
संत सीचेवाल जी ने इस अवसर पर सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि पंजाब की पानी, हवा और धरती को बचाना ही असली सेवा है।
गुरु नानक की धरती से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे पंजाब में फैल चुका है। काली बेईं की निर्मल धाराएं आज हमसे एक ही बात कह रही हैं — अब और नहीं, हमें अपनी प्रकृति को बचाना ही होगा।
