पंजाब में सोमवार का दिन इतिहास रच गया। राज्यभर के 35,000 से अधिक स्कूलों में एक साथ विशेष सुबह की सभाएँ (Morning Assemblies) आयोजित की गईं, जिनमें करीब 70 लाख विद्यार्थियों ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन, उनके बलिदान और शिक्षाओं पर मनन किया।
यह आयोजन 15 दिवसीय “एजुकेशन मॉड्यूल” का हिस्सा है, जिसे पंजाब सरकार ने सभी स्कूलों — सरकारी, निजी और एडेड — में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक अनिवार्य रूप से लागू किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के मूल्यों को स्थापित करना है।
श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं से नई पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास
पंजाब के शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस ने इस ऐतिहासिक पहल पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा,
“आज जो हमने देखा, वह मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। पंजाब के 70 लाख विद्यार्थी — जो हमारे भविष्य हैं — जब धर्म और न्याय की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान पर चिंतन करते हैं, तो यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायक और भावनात्मक है।”
उन्होंने कहा कि यह पहल सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत शिक्षा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी देती है।
शिक्षा में विरासत और संस्कारों का समावेश
हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि राज्य सरकार का यह प्रयास बच्चों को नैतिक दिशा और जीवन के लिए “मोरल कंपास” देने जैसा है। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर पंजाब सरकार ने शिक्षा में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को शामिल किया है।
यह अभियान मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा को सिर्फ जानकारी देने का साधन नहीं, बल्कि संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी सिखाने का माध्यम बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखा
यह एजुकेशन मॉड्यूल 30 नवंबर 2025 तक चलेगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक स्कूल में सुबह की सभा में 10 से 12 मिनट का विशेष सत्र रखा गया है, जिसमें विद्यार्थियों को श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, उनके शहादत दिवस, माता गुजरी जी के जीवन, और खालसा पंथ की स्थापना के बारे में बताया जाएगा।
साथ ही, विद्यालयों में विशेष व्याख्यान, कविता पाठ, भाषण प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन और ऐतिहासिक पुस्तकों का वितरण भी किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के ज़रिए विद्यार्थियों को सार्वभौमिक भाईचारे, धार्मिक सहिष्णुता, और न्याय की भावना से जोड़ा जा रहा है।
शिक्षा के साथ संस्कारों का संगम
पंजाब सरकार का यह कदम न सिर्फ शिक्षा जगत में, बल्कि समाज में भी एक नई सोच को जन्म दे रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जीवन धर्म की रक्षा, मानवता और बलिदान की भावना का प्रतीक है। उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा,
“हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सिर्फ विद्वान न बनें, बल्कि ऐसे नागरिक बनें जो सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ।”
पंजाब का यह अभियान शिक्षा और संस्कार का संगम है — जहाँ बच्चे किताबों के साथ-साथ अपने गौरवशाली इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं से भी जुड़ रहे हैं। श्री गुरु तेग बहादुर जी की प्रेरणा से निकला यह प्रयास, राज्य की भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण की एक अनमोल शुरुआत साबित हो रहा है।
