पंजाब, जो कभी पराली के धुएं और प्रदूषण के लिए बदनाम था, आज देश में पर्यावरण सुधार की नई कहानी लिख रहा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार, जिन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य का सवाल मानकर लड़ाई छेड़ी। 2022 में सरकार बनने के बाद से भगवंत मान ने साफ कहा था – “पंजाब की हवा अब धुएं में नहीं घुटेगी।” और आज, तीन साल बाद, यह वादा सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि ज़मीनी हकीकत में बदल चुका है।
पराली जलाने में 90% की ऐतिहासिक कमी
2021 में जहां पंजाब में पराली जलाने के 4,327 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 415 रह गई। यानी लगभग 90 प्रतिशत की कमी! यह आंकड़ा बताता है कि मान सरकार की नीति सिर्फ कागज़ों में नहीं, खेतों तक पहुंची है। यह परिवर्तन पंजाब के इतिहास में एक नई दिशा दिखाता है — जब सरकार, किसान और समाज मिलकर बदलाव की मिसाल बनते हैं।
खेतों तक पहुंचा समाधान
भगवंत मान सरकार ने किसानों को सज़ा का डर दिखाने के बजाय सहयोग का हाथ बढ़ाया। हर जिले में अभियान चलाया गया, हज़ारों CRM मशीनें किसानों को मुफ्त या सब्सिडी पर दी गईं। अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से मिले, उन्हें समझाया कि पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाना ही सही रास्ता है। परिणाम यह हुआ कि किसान खुद इस बदलाव के साथी बन गए। प्रदूषण पर काबू, हवा में राहत
संगरूर, बठिंडा, लुधियाना जैसे जिले, जो पहले पराली जलाने के केंद्र माने जाते थे, अब बदलाव के प्रतीक बन चुके हैं। 2025 के अक्टूबर में इन इलाकों का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) पिछले सालों की तुलना में 25 से 40 प्रतिशत तक सुधरा। इसका असर न सिर्फ पंजाब की हवा पर बल्कि दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखा। अब पंजाब के खेतों से उठने वाला धुआं कम हो गया है, और वहां से हरी सोच की नई हवा चल रही है।
किसान बने बदलाव के साथी
इस अभियान की असली ताकत रहे किसान। सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। किसानों ने भी जिम्मेदारी दिखाई — कई गांवों में लोग मिलकर मशीनें चला रहे हैं, पराली से खाद और बायो-एनर्जी बना रहे हैं। पराली, जो कभी प्रदूषण की जड़ थी, अब आय और नवाचार का साधन बन गई है।
पंजाब बना राष्ट्रीय प्रेरणा
मान सरकार ने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और नीति सही दिशा में चले, तो सालों पुरानी समस्याएं भी खत्म की जा सकती हैं। आज पंजाब की यह कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा है। जिस पराली को कभी देशभर में “प्रदूषण की वजह” कहा जाता था, वही अब बदलाव की मिसाल बन चुकी है।
भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब ने यह दिखा दिया है कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। यह सिर्फ एक नीतिगत सफलता नहीं, बल्कि एक सोच का परिवर्तन है — जहां सरकार और जनता एक दिशा में काम करें, तो हवा भी साफ होती है और धरती भी हरी-भरी रहती है।
अब पंजाब सिर्फ खेतों की उपज के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और हरियाली की क्रांति के लिए भी जाना जा रहा है। भगवंत मान सरकार ने वाकई यह साबित कर दिया है — जब इरादा सच्चा हो, तो धुआं भी रोशनी में बदल जाता है।
