पंजाब में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर किए गए प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। राज्य में नहरों और जल-मार्गों की व्यापक सफाई और बहाली के चलते किसानों तक पानी की पहुंच पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है और सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
हजारों किलोमीटर नहरों की सफाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 15,539 किलोमीटर लंबी नहरों की सफाई की गई है। इसके साथ ही 18,349 जल-मार्गों (वॉटरकोर्स) को बहाल किया गया है। इन कार्यों का उद्देश्य खेतों तक नहर का पानी सुचारू रूप से पहुंचाना और सिंचाई व्यवस्था में आने वाली बाधाओं को दूर करना था।
पहली बार कई इलाकों तक पहुंचा नहरी पानी
इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि 1,365 स्थानों पर पहली बार नहर का पानी पहुंचा है। जिन क्षेत्रों में पहले किसान मुख्य रूप से ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भर थे, वहां अब नहरों के जरिए सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
सिंचाई क्षेत्र में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नहर आधारित सिंचाई का दायरा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। पहले जहां लगभग 22.3 लाख एकड़ भूमि नहरों के पानी से सिंचित होती थी, वहीं अब यह क्षेत्र बढ़कर 47.8 लाख एकड़ तक पहुंच गया है। इससे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिला है और खेती की लागत कम करने में भी मदद मिली है।
भूजल पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों के पानी के बढ़ते उपयोग से भूजल पर दबाव कम होगा। पंजाब लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में सतही जल के अधिक इस्तेमाल से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
किसानों को मिल रही बड़ी राहत
नहर नेटवर्क के विस्तार और जल-मार्गों की बहाली से किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
