मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने का ऐलान किया है। यह समिति गांव के लोगों और विशेषज्ञों को मिलाकर बनाई जाएगी, जो बायोगैस प्लांट से जुड़ी सभी चिंताओं और आपत्तियों की गहराई से जांच करेगी।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर तालमेल संघर्ष समिति के नेता गुरतेज सिंह और अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और बिना उनकी सहमति के कोई जबरदस्ती नहीं की जाएगी।
क्या करेगी यह समिति?
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह समिति हर पहलू की जांच करेगी, ग्रामीणों की समस्याओं को समझेगी और फिर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति को तय समय के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। सरकार इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी साफ कहा कि प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर प्लांट किसी नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ पर्यावरण की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि गांववालों के हक की भी सुरक्षा करना है।
दूसरे गांव का उदाहरण भी दिया
मुख्यमंत्री ने इसी मौके पर घुंघराली गांव में लगे बायोगैस प्लांट का उदाहरण दिया, जिसे गांव वालों की मंज़ूरी और सहयोग से शुरू किया गया था। इस प्लांट ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना काम किया और गांव को भी इससे लाभ हुआ। मीटिंग में घुंघराली गांव के एक प्रतिनिधि ने भी अपना अनुभव साझा किया, जिससे अखाड़ा गांव के लोगों को भरोसा मिला।
ग्रामीणों ने जताया धन्यवाद
अखाड़ा गांव के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और भरोसा दिलाया कि वे समिति को पूरा सहयोग देंगे, ताकि इस समस्या का शांतिपूर्ण और लाभकारी हल निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस कदम से यह साफ हो गया है कि सरकार जनता की आवाज़ सुनने और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद क्या समाधान निकलता है और क्या यह प्लांट गांव के लिए फायदेमंद साबित होता है।
