पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत भारी हंगामे के साथ हुई। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के बीच जोरदार बहस छिड़ गई।
दरअसल, प्रताप बाजवा ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ कोई स्टेज लगा हो और सरकार नाटक कर रही हो। इस टिप्पणी से सत्तापक्ष भड़क उठा।
अमन अरोड़ा ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि बाजवा ने जो कहा है, वह सदन की गरिमा का अपमान है। उन्होंने कहा, “प्रताप बाजवा जनता के इस पवित्र सदन को ‘स्टेज’ बता रहे हैं।” अरोड़ा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाजवा और भाजपा के बीच अंदरूनी सेटिंग हो चुकी है।
क्या है ‘सीआईएसएफ’ विवाद?
बहस की जड़ में भाखड़ा परियोजना पर सीआईएसएफ की तैनाती को लेकर सरकार द्वारा लाया गया एक प्रस्ताव था, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा था। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बाजवा से इस प्रस्ताव का विरोध करने को कहा और बदले में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर केस दर्ज करवाने की बात हुई।
अरोड़ा ने प्रताप बाजवा को निशाने पर लेते हुए कहा, “असल स्टेज आर्टिस्ट तो बाजवा हैं, जो यहां कुछ और कहते हैं और दिल्ली जाकर कुछ और करते हैं।” उन्होंने सवाल किया कि बाजवा को खुद तय करना चाहिए कि वह नेता हैं या कलाकार।
विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की मांग
अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि प्रताप बाजवा ने जिस तरह से विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, उसके लिए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बाजवा सीआईएसएफ की तैनाती पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें ये तक नहीं पता कि पंजाब सचिवालय चंडीगढ़ में है, जो कि यू.टी. प्रशासन के अधीन आता है, न कि राज्य सरकार के।
इस पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा के माहौल को गरमा दिया। एक ओर जहां विपक्ष सरकार पर ‘ड्रामा’ करने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तापक्ष विपक्ष को ‘दोहरी राजनीति’ का दोषी बता रहा है। सीआईएसएफ की तैनाती से जुड़ा यह मुद्दा अब सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक तकरार और निजी आरोप-प्रत्यारोप भी गहराते जा रहे हैं।
