देशभर में कैंसर, HIV, ट्रांसप्लांट, दुर्लभ बीमारियों और खून संबंधी बीमारियों से पीड़ित लाखों मरीजों को जल्द ही इलाज के खर्च में बड़ी राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार की एक विशेष अंतर-विभागीय समिति ने लगभग 200 महंगी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी कम या खत्म करने की सिफारिश की है। इससे इलाज की लागत में भारी गिरावट आने की संभावना है, जिससे हज़ारों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
किन दवाओं पर मिलेगी राहत?
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 69 दवाओं पर पूरी कस्टम ड्यूटी माफ करने की सिफारिश की गई है। इनमें प्रमुख दवाएं शामिल हैं:
-
पेम्ब्रोलिज़ुमैब (Keytruda) – फेफड़ों और त्वचा के कैंसर के इलाज में उपयोगी
-
ओसीमर्टिनिब (Tagrisso) – एडवांस्ड फेफड़ों के कैंसर के लिए
-
ट्रास्टुज़ुमैब डेरक्सटेकन (Enhertu) – स्तन कैंसर के इलाज में प्रभावी
इन दवाओं की कीमत लाखों रुपये प्रति खुराक होती है और कस्टम ड्यूटी के कारण ये आम मरीजों की पहुंच से बाहर थीं।
इसके अलावा 74 अन्य दवाओं पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर 5% करने की सिफारिश की गई है, जैसे:
-
हाइड्रॉक्सी यूरिया – सिकल सेल एनीमिया और कुछ प्रकार के कैंसर में उपयोगी
-
एनोक्सापारिन – खून के थक्कों को रोकने में मददगार
दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के लिए बड़ी राहत
रिपोर्ट में दुर्लभ बीमारियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इन बीमारियों का इलाज करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता है। समिति ने 56 ऐसी दवाओं की अलग सूची तैयार की है जिन पर भी पूरी कस्टम ड्यूटी हटाने की सिफारिश की गई है। इनमें शामिल हैं:
-
Zolgensma – रीढ़ की मांसपेशियों की दुर्लभ बीमारी का इलाज, एक खुराक की कीमत 16-18 करोड़ रुपये
-
Spinraza और Evrysdi – न्यूरोमस्कुलर बीमारियों के लिए उपयोगी
-
Cerezyme और Takzairo – दुर्लभ जेनेटिक और एंजाइम से जुड़ी बीमारियों के इलाज में
ये दवाएं जीन थेरेपी और एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी पर आधारित होती हैं और दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में गिनी जाती हैं।
पैनल कौन है और इसका उद्देश्य क्या है?
इस सिफारिशी रिपोर्ट को केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2024 में गठित पैनल ने तैयार किया है। इसकी अगुवाई संयुक्त ड्रग कंट्रोलर आर. चंद्रशेखर कर रहे हैं। इस पैनल में शामिल संस्थाएं हैं:
-
ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च)
-
DGHS (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज)
-
फार्मास्युटिकल्स विभाग
इस समिति का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों के इलाज को आम लोगों के लिए सस्ता और सुलभ बनाना है।
आगे क्या होगा?
समिति अब वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर इन सिफारिशों को लागू करने की दिशा में काम करेगी। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि DGHS के अंतर्गत एक स्थायी अंतर-विभागीय समिति बनाई जाए, जो समय-समय पर ऐसी महंगी दवाओं की समीक्षा कर कस्टम ड्यूटी में छूट से जुड़े सुझाव देती रहे।
मरीजों और परिवारों को क्या लाभ होगा?
-
महंगी दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती
-
इलाज अब लाखों की जगह हज़ारों रुपये में संभव
-
दुर्लभ बीमारियों, कैंसर, और ट्रांसप्लांट जैसे मामलों में आर्थिक बोझ घटेगा
-
आयात की गई आधुनिक दवाएं अब और सस्ती व सुलभ होंगी
यह कदम भारत में स्वास्थ्य सेवा को अधिक न्यायसंगत और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
