पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आज उस समय माहौल गरमा गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान का भाषण चल रहा था और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बीच में टोका-टोकी शुरू कर दी। प्रताप बाजवा के बोलने पर मुख्यमंत्री मान ने शांत रहते हुए जवाब दिया,
“बाजवा साहब, आपको भी बोलने का पूरा मौका मिलेगा क्योंकि दिन अभी लंबा है और अभी तो सिर्फ 12 बजे हैं।”
इस पर प्रताप सिंह बाजवा ने तंज कसते हुए कहा,
“12 तो आपके बजे होंगे, हमारे नहीं।”
बस फिर क्या था, इस टिप्पणी के बाद सदन में ज़ोरदार हंगामा शुरू हो गया। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के विधायकों ने इस बयान को एक धार्मिक अपमान की तरह लिया और बाजवा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
“सीएम की कुर्सी नहीं जच रही” – भगवंत मान
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री मान ने दो टूक कहा कि
“विरोधियों को तकलीफ सिर्फ इस बात की है कि उन्हें अब मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिल रही।”
उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि
“60 साल तक कांग्रेस ने पंजाब में सिर्फ ड्रामा किया है। अब जब जनता ने असली बदलाव लाया है, तो ये लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री का यह बयान आते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तेज़ बहस छिड़ गई। सदन का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
“12 बजे” वाले बयान पर विवाद क्यों?
दरअसल, “12 बजे” वाला जुमला आम तौर पर हास्य या तंज़ में इस्तेमाल किया जाता है और अक्सर एक विशेष समुदाय के लिए अपमानजनक तौर पर देखा जाता है। सत्तापक्ष के विधायकों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला मानते हुए प्रताप बाजवा पर टिप्पणी वापस लेने का दबाव डाला।
विपक्ष की सफाई
विपक्ष की ओर से सफाई दी गई कि बाजवा की टिप्पणी का आशय व्यक्तिगत मज़ाक तक सीमित था और उसका धार्मिक भावना से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन AAP विधायक पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
इस पूरी घटना ने विधानसभा की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सत्ता पक्ष धार्मिक अपमान की बात कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक चाल बता रहा है। अब देखना यह है कि इस बयान पर सदन की कार्यवाही में क्या अगला कदम उठाया जाता है – क्या माफी मांगी जाएगी, निंदा प्रस्ताव आएगा या फिर मामला और भी तूल पकड़ेगा।
पंजाब की राजनीति एक बार फिर गरम बहस और आरोप-प्रत्यारोप के मोड़ पर है।
