नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए, पंजाब मंडी बोर्ड ने राज्य की प्रमुख मंडियों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। मंडी बोर्ड के चेयरमैन सरदार हरचंद सिंह बरसट ने जानकारी दी कि जालंधर, पटियाला, फिरोजपुर और लुधियाना की मंडियों में 24.5 करोड़ रुपये की लागत से सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस योजना से हर साल करीब 3.5 करोड़ रुपये की बिजली बचत होगी, जिससे मंडियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
हरियाली और पर्यावरण पर विशेष जोर
सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, मंडी बोर्ड ने हरियाली और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। चेयरमैन बरसट ने बताया कि राज्य भर की मंडियों में 50,000 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। यह कदम मंडियों और उनके आसपास के क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण कम करने में मदद करेगा।
बुनियादी ढांचे का विकास और आधुनिकीकरण
बरसट ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में राज्य भर की अनाज और सब्ज़ी मंडियों, मार्केट कमेटियों, और ई-नाम पोर्टल से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने तलवंडी साबो के गेस्ट हाउस के नवीनीकरण कार्य को जल्द पूरा करने का आदेश दिया ताकि उसे किसान भवन, चंडीगढ़ की तर्ज पर उपयोग में लाया जा सके।
इसके अलावा उन्होंने मंडी बोर्ड की आवासीय कॉलोनियों में खाली मकानों को जल्द से जल्द कर्मचारियों को आवंटित करने के निर्देश भी दिए।
डिजिटल प्रबंधन और आय में वृद्धि
पटियाला की सनौर मंडी में बूम बैरियर सिस्टम लगाने से मंडी फीस में बढ़ोतरी देखी गई है। इस सफलता को देखते हुए अब अन्य मंडियों में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, अवैध कब्जों को हटाने, स्वच्छता बनाए रखने, और बायो-वेस्ट से आय सृजन जैसे उपायों पर भी सख्ती से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
रिकॉर्ड आय और अभिनव पहल
पंजाब मंडी बोर्ड को इस साल अब तक 842 प्लॉटों की ई-नीलामी से 373 करोड़ रुपये की आय हुई है। इसके अलावा, कवर शेडों को ऑफ-सीजन में आम जनता के लिए खोलने की योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस पहल से एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है, जो मंडियों के मौजूदा संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उदाहरण है।
पंजाब मंडी बोर्ड की ये सभी पहलें – नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय सुधार, डिजिटल विकास, आयवर्धन और सामाजिक उपयोगिता – एक आधुनिक, जिम्मेदार और टिकाऊ कृषि प्रणाली की ओर कदम हैं। इससे किसानों, व्यापारियों और आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा, साथ ही मंडियों की छवि भी और बेहतर होगी।
