नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस का वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की चुनावी प्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, जिससे बीजेपी को मामूली बहुमत हासिल हुआ।
धांधली के ‘पुख्ता सबूत’ पेश करने का वादा
राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी की आगामी रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, “हम आने वाले दिनों में एटम बम जैसे सबूत पेश करेंगे, जो बताएंगे कि वोटर सूची में व्यापक गड़बड़झाला कैसे किया गया।” उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव आयोग उनकी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था, इसलिए कांग्रेस ने स्वयं छह महीने की गुप्त पड़ताल की।
‘15 सीटों की धांधली ने बदला प्रधानमंत्री का चेहरा’
नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए कहा, “अगर इन 15 सीटों पर धांधली न होती, तो आज नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं होते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष होते, तो मौजूदा सत्ता समीकरण बदल जाते।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र चुनावों में संदेह
उन्होंने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी गड़बड़ी के संकेत मिलते रहने का ज़िक्र किया। राहुल गांधी ने कहा, “महाराष्ट्र चुनावों में हमारे संदेह और प्रबल हुए, जब एक करोड़ नए मतदाता जोड़े गए और उस प्रक्रिया में अनियमितता दिखाई दी।”
अरुण जेटली पर ‘धमकी’ का आरोप
राहुल गांधी ने पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कृषि कानूनों के विरोध के दौरान जेटली उन्हें धमकाने आए थे, और चेतावनी दी थी कि अगर वे सरकार का विरोध जारी रखेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। राहुल ने कहा, “शायद उन्हें नहीं पता कि वे किससे बात कर रहे हैं।”
चुनावी प्रक्रिया पर सवाल, प्रणाली को बताया ‘मृत’
कांग्रेस नेता ने चुनावी प्रक्रिया को “निष्प्रभावी” करार दिया। उन्होंने कहा, “आज भारत में चुनाव प्रणाली मर चुकी है।” उनका तर्क था कि जब लोकतंत्र की रीढ़—मतदान— ही असुरक्षित हो, तो entire सिस्टम ही सवाल के घेरे में आ जाता है।
कांग्रेस की आने वाली लड़ाई
राहुल गांधी ने अंत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनमानस को आगाह किया कि पार्टी वोटर लिस्ट में धांधली के सबूतों के साथ आएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि खुलासे के बाद देश जान जाएगा कि चुनाव आयोग ने किस तरह एक पक्षीय रवैया अपनाया।
इस बयान के बाद आगामी दिनों में राजनीतिक बहस और चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर नई लड़ाई का आगाज़ हो गया है।
