पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य की फसली विविधता अभियान को इस साल बड़ी सफलता मिली है। खरीफ सीज़न 2025 में मक्की की खेती का रकबा 16.27% बढ़कर 1 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। पिछले साल यह रकबा 86,000 हेक्टेयर था।
पायलट प्रोजेक्ट का असर
कृषि मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कृषि विविधता और भूमिगत जल संरक्षण के लिए एक खास पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके तहत छह जिलों — बठिंडा, संगरूर, कपूरथला, जालंधर, गुरदासपुर और पठानकोट — में 12,000 हेक्टेयर जमीन पर धान की जगह खरीफ की मक्की बोने का लक्ष्य रखा गया।
किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही किसानों को नई फसल की तकनीक, देखभाल और लाभ समझाने के लिए 185 किसान मित्र नियुक्त किए गए।
उच्च स्तरीय बैठक और निर्देश
अपने कार्यालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में स. खुड्डियां ने मक्की की फसल की प्रगति की समीक्षा की और सुचारू खरीद के लिए ज़रूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेचने का मौका मिलना चाहिए। इसके लिए जिला स्तर पर कृषि विभाग, पंजाब मंडी बोर्ड और मार्कफेड के अधिकारियों की संयुक्त समितियाँ बनाई जाएँगी।
मंत्री ने मक्की उगाने वाले किसानों से अपील की कि वे मंडियों में पूरी तरह सूखी फसल लेकर आएँ, ताकि खरीद के समय नमी की समस्या न हो।
नमी का स्तर 14% से कम होना ज़रूरी
कृषि विभाग के प्रबंधकीय सचिव डॉ. बसंत गर्ग ने बताया कि मक्की की फसल में नमी का स्तर 14% से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए कि वे किसानों को इस बारे में जागरूक करें। सही नमी से न केवल फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी मिलेगा।
बैठक में मौजूद अधिकारी
बैठक में पंजाब मंडी बोर्ड के सचिव श्री रामवीर, मार्कफेड के प्रबंध निदेशक श्री कुमार अमित, कृषि विभाग के निदेशक श्री जसवंत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर फसल की खरीद, भंडारण और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा की।
किसानों के लिए फायदे
इस अभियान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मक्की की खेती से पानी की खपत धान की तुलना में काफी कम होती है। इससे राज्य के भूमिगत जलस्तर को बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही फसली विविधता से किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने का खतरा कम होगा और आय के नए स्रोत मिलेंगे।
पंजाब में खरीफ की मक्की के रकबे में हुई बढ़ोतरी, फसली विविधता अभियान की सफलता का साफ संकेत है। सरकार की आर्थिक सहायता, मार्गदर्शन और बेहतर खरीद व्यवस्था से किसानों का रुझान मक्की की ओर बढ़ा है। यदि यह रफ्तार जारी रही, तो राज्य न केवल जल संरक्षण में आगे होगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
