अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को अलास्का के एंकरेज शहर में एक अहम शिखर बैठक की। यह मुलाकात करीब तीन घंटे चली और दोनों नेताओं ने इसे “फलदायी” और “सम्मानजनक” बताया। बैठक का मुख्य विषय यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों पर केंद्रित रहा, हालांकि किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हो सकी।
बैठक में क्या हुआ?
बैठक में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे। अमेरिकी पक्ष से ट्रंप के साथ मार्को रूबियो और कुछ वरिष्ठ सलाहकार थे, जबकि रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव और आर्थिक सलाहकार किरिल दिमित्रिएव शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति पुतिन का अमेरिका में B-2 बॉम्बर के साथ स्वागत किया गया। जब पुतिन रेड कार्पेट पर पहुंचे तो ट्रंप ने तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया।
ट्रंप ने बैठक के बाद कहा कि “कोई समझौता तब तक नहीं होगा, जब तक पूरा समझौता न हो।” उन्होंने माना कि कुछ मुद्दों पर प्रगति हुई है लेकिन कई बिंदुओं पर मतभेद बने हुए हैं। पुतिन ने बातचीत को “गहन और उपयोगी” बताया और कहा कि रूस ईमानदारी से युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन उसकी “वैध चिंताओं” को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और पुतिन की चेतावनी
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने पत्रकारों के सवाल नहीं लिए। पुतिन ने यूरोप और यूक्रेन को संदेश देते हुए कहा कि वे इस वार्ता को रचनात्मक रूप से लें और किसी भी तरह की बाधा न डालें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी “उकसावे या पर्दे के पीछे की साजिश” से हालात बिगड़ सकते हैं। पुतिन ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन का मुद्दा रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और यूरोप में सुरक्षा संतुलन बहाल होना चाहिए।
रूस की शर्तें और यूक्रेन का रुख
रूस लगातार यह मांग करता आया है कि यूक्रेन नाटो (NATO) में शामिल होने की कोशिश छोड़ दे और अपने पूर्वी इलाकों को रूस को सौंप दे। लेकिन यूक्रेन इन शर्तों को अस्वीकार करता है। उसका कहना है कि किसी भी शांति समझौते में उसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी चाहिए, ताकि भविष्य में रूस फिर हमला न कर सके।
भविष्य की संभावनाएं
ट्रंप ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए कोई ठोस रोडमैप अभी तैयार नहीं हो सका। पुतिन ने भी संकेत दिया कि अमेरिका और रूस को सहयोग की जरूरत है और उन्होंने अगली मुलाकात मॉस्को में होने की उम्मीद जताई।
ट्रंप-पुतिन संबंध और आलोचना
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने पुतिन के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। 2018 की मुलाकात के बाद भी उन्हें अमेरिका में आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस बार भी ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को युद्ध का जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि वह “24 घंटे में शांति ला सकते हैं।”
चेतावनी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ट्रंप ने माना कि पुतिन की सख्त शर्तों से वे निराश हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूस युद्धविराम पर सहमत नहीं हुआ तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे। इसके बावजूद दोनों नेताओं की अलास्का में हुई यह बैठक ऐतिहासिक मानी जा रही है। गौरतलब है कि 1867 में अमेरिका ने अलास्का को रूस से खरीदा था और अब करीब डेढ़ सदी बाद यहीं पर दोनों देशों के प्रमुख आमने-सामने हुए।
