12 जून को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एयर इंडिया की बोइंग 787-8 फ्लाइट हादसे का शिकार हो गई। टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही यह विमान क्रैश हो गया। अब इस हादसे को लेकर भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसमें कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं।
टेकऑफ के बाद अचानक बंद हो गए दोनों इंजन
AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट ने सामान्य रूप से टेकऑफ किया और उड़ान के जरूरी स्तर तक भी पहुंच गई थी। लेकिन तभी अचानक दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ मोड में चले गए। इसका मतलब यह है कि इंजन को ईंधन की सप्लाई रुक गई, जिससे उन्हें पावर मिलनी बंद हो गई और विमान नियंत्रण खो बैठा। नतीजतन, फ्लाइट कुछ ही पलों में नीचे गिर गई और क्रैश हो गई।
क्या मानवीय भूल थी या तकनीकी खामी?
इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोनों इंजन एक साथ कैसे बंद हो गए। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग को जांचा गया। उस रिकॉर्डिंग से पता चला कि किसी भी पायलट ने जानबूझकर फ्यूल स्विच बंद नहीं किए।
कॉकपिट की बातचीत कुछ इस तरह थी:
- मुख्य पायलट: “तुमने स्विच क्यों बंद किया?”
- को-पायलट: “मैंने नहीं किया।”
इससे साफ है कि पायलटों ने जानबूझकर कोई गलती नहीं की। ऐसे में तकनीकी खराबी की आशंका ज़्यादा लग रही है, लेकिन मानवीय त्रुटि को भी पूरी तरह नकारा नहीं गया है। जांच अभी जारी है।
आपात स्थिति में इस्तेमाल हुआ टर्बाइन
जैसे ही इंजन बंद हुए, विमान की आपातकालीन प्रणाली सक्रिय हो गई। रिपोर्ट में बताया गया कि रैम एयर टर्बाइन (RAT) अपने-आप बाहर आ गई थी। यह तभी बाहर आती है जब विमान को इमरजेंसी पावर की जरूरत होती है। यानी विमान के पायलटों ने इंजन को दोबारा चालू करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
विमान ज़मीन से ज्यादा ऊंचाई नहीं पकड़ पाया और रनवे से लगी दीवार को पार करने से पहले ही क्रैश हो गया। सौभाग्य से विमान में कोई यात्री नहीं था, क्योंकि यह एक ट्रायल या टेस्ट उड़ान थी।
आगे की जांच में क्या हो सकता है?
AAIB की यह शुरुआती रिपोर्ट है, और पूरी घटना की गहराई से जांच अभी जारी है। तकनीकी टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि फ्यूल कटऑफ स्विच अपने-आप कैसे बदल गए। क्या यह कोई सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी थी या सिस्टम फेल्योर, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
यह हादसा एक बार फिर विमान सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि बड़ी तकनीकी समस्याएं भी कभी-कभी टेकऑफ जैसे शुरुआती चरण में सामने आ सकती हैं। विमानन विभाग, एयर इंडिया और AAIB तीनों अब इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसा कोई हादसा दोबारा न हो।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उम्मीद की जा रही है कि इस हादसे से मिलने वाले सबक से विमान सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बनेगी।
