पंजाब के मोगा जिले में सतलुज नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब गांव-गांव दिखाई देने लगा है। धर्मकोट इलाके के संघेड़ा, कंबो खुर्द, सेरेवाला समेत करीब 30 गांव बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहे हैं। खेतों में खड़ी हजारों एकड़ फसल पानी में डूब चुकी है और ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना बड़ी चुनौती बन गया है।
नाव बना सहारा
गांव के लोगों का कहना है कि गुरुवार शाम चार बजे के बाद से सतलुज का पानी तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। देखते ही देखते खेत जलमग्न हो गए और कच्चे रास्ते भी बहने लगे। अब हालत यह है कि गांवों में आना-जाना मुश्किल हो गया है और लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। कई परिवारों ने घर का जरूरी सामान छतों पर पहुंचा दिया है, वहीं पशुओं को भी ऊंचाई वाले स्थानों या फिर बांध के पास बांध दिया गया है।
चारे और पानी की किल्लत
गांववालों की सबसे बड़ी चिंता पशुओं के लिए चारे की है। चारा पूरी तरह पानी में डूब चुका है, जिससे जानवरों को खिलाना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, पीने के पानी का संकट भी गहराता जा रहा है। खेतों के साथ-साथ हैंडपंप और कुएं भी डूब गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि साफ पानी मिलना अब बहुत कठिन हो गया है और प्रशासन की तरफ से भी अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।
6 हजार एकड़ फसल प्रभावित
सूत्रों के अनुसार, सतलुज नदी के किनारे बसे इन गांवों में करीब 6 हजार एकड़ फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। धान और मक्के की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। किसानों को डर है कि अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा या डैम से पानी छोड़ा गया, तो उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। इससे करोड़ों रुपये का नुकसान होना तय है।
ग्रामीणों की चिंताएं
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर साल बरसात के मौसम में सतलुज का पानी परेशानी खड़ी करता है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हैं। पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ा है। लोग दिन-रात जागकर घरों और मवेशियों की सुरक्षा कर रहे हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं क्योंकि सुरक्षित जगहों तक पहुंचना आसान नहीं है।
प्रशासन से उम्मीदें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि तुरंत राहत सामग्री, पीने के पानी और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, जिन किसानों की फसल डूब चुकी है, उनके नुकसान का सही आकलन कर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
हालात बिगड़ने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लगातार बारिश हुई या सतलुज में और पानी छोड़ा गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को पहले से तैयार रहना होगा ताकि गांवों को पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके।
मोगा जिले के गांवों के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती रोजमर्रा की जिंदगी को संभालने और अपनी फसल व मवेशियों को बचाने की है। सतलुज का पानी अगर काबू में नहीं आया तो किसानों और ग्रामीणों की मुसीबतें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल लोग आस लगाए बैठे हैं कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द राहत पहुंचाए।
