पंजाब बाढ़ की भीषण त्रासदी से गुजर रहा है। खेत, घर और गांव पानी में डूब चुके हैं। ऐसे मुश्किल वक्त में राज्यसभा सदस्य और समाजसेवी संत बलबीर सिंह सीचेवाल लोगों के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं। उनकी संवेदनशीलता और सेवाभाव इस बात का सबूत है कि वह सिर्फ़ नेता नहीं बल्कि इंसानियत के सच्चे प्रहरी हैं।
29 दिन से मंड क्षेत्र बाढ़ की चपेट में
ब्यास नदी के बदलते रुख ने मंड इलाके में कहर मचा रखा है। यहां के 46 गांव प्रभावित हैं और लगभग 15,000 एकड़ जमीन पानी के नीचे चली गई है। नदी घरों को धकेल रही है, जिससे परिवारों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। लेकिन इस पूरे समय में संत सीचेवाल लगातार लोगों के बीच खड़े नज़र आए।
तीन दिन-तीन रातों में तैयार की बड़ी नाव
संत सीचेवाल और उनकी टीम ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तीन दिन और तीन रातों में एक विशाल नाव तैयार की। यह नाव न सिर्फ़ लोगों को सुरक्षित ले जा सकती थी बल्कि बड़ी मशीनरी और पशुओं को भी बचाने में सक्षम रही। किसानों की महंगी मशीनें और पशु उनके जीवन का सहारा हैं। अगर यह डूब जाते तो उनका नुकसान और भी बढ़ जाता। इस नाव ने दर्जनों परिवारों और उनकी संपत्ति को बचाने में अहम भूमिका निभाई।
रोज़ाना 10 घंटे सेवा
सीचेवाल और उनकी टीम रोज़ाना लगभग 10 घंटे नाव चलाकर लोगों तक भोजन, पानी, दवाइयां और ज़रूरी सामान पहुंचाते हैं। जब कई नेता केवल दौरे करके लौट गए, तब संत सीचेवाल पिछले तीन हफ्तों से लगातार उसी इलाके में डटे हुए हैं। वे गांवों के बीच रहकर लोगों को ढांढस बंधा रहे हैं और राहत पहुंचा रहे हैं।
बच्चों, परिवारों और पशुओं को खुद बचाया
हर सुबह 8.30 बजे से लेकर शाम तक संत सीचेवाल खुद नाव में बैठकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाते। उन्होंने कई बार छोटे बच्चों को अपनी गोद में उठाया, परिवारों को सामान समेटने में मदद की और यहां तक कि 300 से ज्यादा पशुओं को भी सुरक्षित बचाया।
22 अगस्त को उनकी इंग्लैंड की यात्रा तय थी, लेकिन उन्होंने उसे रद्द कर दिया और कहा –
“मैं ऐसे समय में अपने लोगों को छोड़ नहीं सकता।”
लोगों को मिला सहारा
उनकी सेवा देखकर लोगों का आत्मविश्वास लौटा। एक किसान निर्मल सिंह ने कहा –
“जब हमारी फसल पानी में डूब गई, तो लगा सब खत्म हो गया। लेकिन जब बाबा जी हर सुबह नाव लेकर आते, तो हमें लगता कि हम अकेले नहीं हैं।”
यह भावनाएं साफ दिखाती हैं कि संत सीचेवाल ने इस आपदा में लोगों के दिलों को सहारा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि अन्य नेता और मंत्री बाढ़ के कई दिन बाद क्षेत्र में पहुंचे। हरभजन सिंह ने 18 अगस्त को दौरा किया, पंजाब के मंत्री 20 अगस्त को आए और मुख्यमंत्री 22 अगस्त को। लेकिन सीचेवाल पहले दिन से ही लोगों के बीच थे और आज भी वहीं मौजूद हैं।
संकट की इस घड़ी में संत सीचेवाल ने यह साबित किया है कि असली नेता वही होता है जो लोगों के बीच खड़ा रहे, उनके दुख बांटे और उन्हें संभाले। उनके कामों ने न सिर्फ़ सैकड़ों परिवारों को बचाया बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि पंजाब की ताकत उसकी एकजुटता और सेवा भावना में है।
