भारतीय रुपये ने गुरुवार, 25 सितंबर 2025 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट से थोड़ी राहत पाई। शुरुआती कारोबार में रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 88.60 तक पहुंचा। इससे पहले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 88.75 पर बंद हुआ था।
क्यों दबाव में है रुपया?
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि इस हफ्ते रुपये पर कई झटके एक साथ पड़े।
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एच1बी वीजा फीस में बढ़ोतरी: अमेरिकी फैसले से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत बढ़ेगी।
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ट्रंप प्रशासन के हाई टैरिफ: भारतीय एक्सपोर्ट पर सीधा असर पड़ा है।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली: लगातार हो रही मुनाफावसूली ने रुपये पर दबाव डाला।
इन सब वजहों से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और भारतीय करेंसी ऐतिहासिक स्तर तक फिसल गई।
फॉरेक्स मार्केट का हाल
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 88.65 पर खुला और कुछ देर बाद 88.60 के स्तर तक पहुंचा। एक दिन पहले रुपये ने 88.75 पर क्लोजिंग दी थी, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर था।
डॉलर इंडेक्स और कच्चा तेल
दूसरी तरफ, डॉलर इंडेक्स जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत मापता है, 0.13% गिरकर 97.75 पर आ गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड 0.36% गिरकर 69.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। क्रूड में गिरावट आमतौर पर भारत के लिए राहत की खबर होती है, लेकिन रुपये पर अमेरिकी फैसलों का दबाव इतना ज्यादा है कि इसका असर कम नजर आया।
शेयर बाजार में हल्की रिकवरी
शेयर बाजार में भी सुबह गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, सेंसेक्स ने रिकवरी करते हुए करीब 100 अंक की बढ़त दर्ज की और निफ्टी 50 भी 25,100 के आसपास कारोबार करता दिखा। रुपये की हल्की मजबूती और क्रूड में नरमी ने शेयर बाजार को थोड़ी राहत दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी नीतियों से जुड़े दबाव जारी रहे तो रुपये पर और गिरावट का खतरा बना रहेगा। आईटी सेक्टर पर वीजा फीस का असर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली स्थिति को और बिगाड़ सकती है। हालांकि, डॉलर इंडेक्स और क्रूड की मौजूदा कमजोरी भारतीय बाजार के लिए कुछ संतुलन ला सकती है।
