पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज लोगों को बंदी छोड़ दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह दिन सभी संगतों के लिए अत्यंत महत्व रखता है और इसे मनाने का मकसद मानवता और स्वतंत्रता के संदेश को आगे बढ़ाना है।
बंदी छोड़ दिवस का इतिहास छठे पातशाह, श्री गुरु हरिगोबिंद साहिब जी से जुड़ा है। सन् 1619 में, गुरु जी को ग्वालियर के किले से रिहा किया गया था और वे सच्चखंड श्री हरिमंदर साहिब लौट आए। इस दिन को उनके साहस, धैर्य और मानवता के प्रति उनके समर्पण की याद में मनाया जाता है।
इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और समाज में भाईचारे और स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इंसानियत और न्याय के लिए आवाज़ बुलंद करना कितना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंधुआ प्रथा और अन्य अत्याचारों के खिलाफ भी यह दिन एक प्रेरणा है। बच्चों, युवाओं और समाज के सभी वर्गों को इस दिन के महत्व को समझना चाहिए और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सतत प्रयास करना चाहिए।
बंदी छोड़ दिवस सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि आज भी मानवता और आज़ादी की मशाल जलाए रखने का प्रतीक है।
