पंजाब सरकार ने राज्य में नशे के खिलाफ जारी लड़ाई को और प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की निगरानी के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क लगाया जा रहा है।
सरकार ने अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर और लुधियाना स्थित एसटीएफ दफ्तरों में एआई (AI) तकनीक वाले आधुनिक कैमरे लगाने का आदेश दिया है। इन कैमरों की खासियत यह होगी कि ये न केवल वीडियो रिकॉर्ड करेंगे, बल्कि लोगों की आवाज़ और हरकतों का विश्लेषण भी कर सकेंगे। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
रीयल-टाइम निगरानी अब चंडीगढ़ से
इन कैमरों को चंडीगढ़ स्थित एसटीएफ मुख्यालय से जोड़ा जाएगा। इससे वरिष्ठ अधिकारी राज्य के अलग-अलग इलाकों में चल रही हर कार्रवाई को रीयल-टाइम में देख सकेंगे। इसका उद्देश्य है कि हर ऑपरेशन पारदर्शी और जवाबदेही के साथ पूरा हो।
पिछले कुछ समय में एसटीएफ की कुछ कार्रवाईयों को लेकर सवाल उठे थे। इसी के बाद सरकार ने तय किया कि पूरे सिस्टम को तकनीकी रूप से और मजबूत किया जाए। अब हर ऑपरेशन पर नज़र रखने के लिए अधिकारियों को डिजिटल मॉनिटरिंग का सीधा एक्सेस मिलेगा।
जनवरी 2026 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को एक निजी एजेंसी की मदद से लागू किया जाएगा, जबकि पुलिस विभाग नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। कैमरे लगाने वाली कंपनी ही उनकी देखभाल और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। सरकार ने इसके लिए बजट भी पहले ही मंजूर कर दिया है और योजना को जनवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जेलों में भी हाई-टेक निगरानी सिस्टम
इससे पहले पंजाब सरकार ने राज्य की 18 हाई-सिक्योरिटी जेलों में 647 सीसीटीवी कैमरे, एक्स-रे स्कैनर और बॉडी-वॉर्न कैमरे लगाने का फैसला किया था। ये सभी सिस्टम भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस होंगे ताकि जेलों के अंदर किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को तुरंत रोका जा सके।
नशा विरोधी मुहिम के परिणाम
एसटीएफ की मुहिम के अब तक अच्छे नतीजे सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 (अक्टूबर 2025 तक) में 5,000 से अधिक NDPS मामले दर्ज किए गए और लगभग 8,000 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान करीब 20 किलोग्राम हैरोइन बरामद की गई, जिसका स्रोत पाकिस्तान से होने वाली तस्करी बताया गया है।
सरकार का कहना है कि तकनीक की मदद से अब नशा विरोधी लड़ाई और ज्यादा सटीक, पारदर्शी और असरदार बनेगी। पंजाब को “ड्रग-फ्री स्टेट” बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
