श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र आज श्री आनंदपुर साहिब में शुरू हो गया। पहली बार विधानसभा की बैठक चंडीगढ़ से बाहर हो रही है, जिससे इस सत्र का महत्व और बढ़ गया है। इस मौके पर शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती की प्रतिनिधि होना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
कश्मीरी पंडितों की रक्षा का केंद्र रहा आनंदपुर साहिब
हरजोत बैंस ने अपने संबोधन में कहा कि यह वही धरती है जहाँ कश्मीरी पंडित अपने धर्म की रक्षा की गुहार लेकर गुरु साहिब के चरणों में आए थे। गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने उनकी आबरू और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक महान धर्मयुद्ध की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह स्थान त्याग, साहस और मानवता की मिसाल बन चुका है।
भाई जेता जी की अमर भक्ति का जिक्र
मंत्री बैंस ने भावुक होकर बताया कि यही वह स्थल है, जहाँ भाई जेता जी (भाई जीवण सिंह जी) ने अपनी जान की परवाह किए बिना गुरु तेग बहादुर जी का पवित्र शीश दिल्ली से आनंदपुर साहिब तक पहुँचाया था। गुरु गोबिंद सिंह जी ने उनकी इस सेवा और समर्पण के सम्मान में उन्हें “रंगरटे गुरु के बेटे” कहा था।
खालसा पंथ और साहिबजादों की यादें
उन्होंने आगे कहा कि यही भूमि खालसा पंथ की स्थापना की साक्षी रही है। यहीं गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ का जन्म किया। यह पवित्र माटी चारों साहिबजादों के बचपन की खुशियों और खेलों की भी गवाह है। हरजोत बैंस ने कहा कि आनंदपुर साहिब का हर कण सिख इतिहास, बहादुरी और बलिदान की अनगिनत कहानियों को समेटे हुए है।
सेवा को बताया सबसे बड़ा सौभाग्य
अपने संबोधन के अंत में बैंस ने कहा कि इस धरती की सेवा करना और इसका प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से सबसे बड़ी नेमत है। उन्होंने कहा कि यह अवसर उन्हें विनम्रता, समर्पण और गर्व का एहसास कराता है।
यह विशेष सत्र गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की स्मृति में आयोजित किया गया है, जिससे पंजाब ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शांति, साहस और धार्मिक स्वतंत्रता का संदेश एक बार फिर प्रतिध्वनित हो रहा है।
