देश के कई हवाई अड्डों पर एक हफ्ते से चल रहे IndiGo उड़ान संकट ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार उड़ानें रद्द होने और घंटों की देरी के बीच हजारों यात्री परेशानी में हैं। इस बीच इस मामले में दाखिल पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से साफ इंकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि वे स्थिति की गंभीरता समझते हैं, लेकिन सरकार पहले ही मामले पर कार्रवाई कर रही है, इसलिए अदालत को अभी दखल देने की जरूरत नहीं है।
PIL में मांगी गई तात्कालिक कार्रवाई
यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में एक जन्हित पिटिशन (PIL) के जरिए उठाया गया था। पिटीशन दाखिल करने वाले पक्ष के वकील नरेन्द्र मिश्रा ने कोर्ट से अपील की थी कि उड़ान संकट पर कोर्ट खुद संज्ञान लेकर (suo motu) तत्काल निर्देश दे।
पिटीशन में दावा किया गया कि उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को गंभीर मानसिक, आर्थिक और मानवीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है।
इसके साथ ही प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था और उचित मुआवजे की भी मांग की गई थी।
उड़ानें रद्द होने का बड़ा पैमाना
कोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 7 दिनों में लगभग 2500 उड़ानें देरी का शिकार हुईं और देश के 95 हवाई अड्डे इससे प्रभावित हुए।
पायलटों की ड्यूटी से जुड़े नए FDTL नियमों की गलत प्लानिंग को इस संकट की मुख्य वजह बताया गया है।
CJI ने कहा कि यदि सरकार हालात पर कार्रवाई नहीं कर रही होती तो अदालत हस्तक्षेप करती, लेकिन फिलहाल केंद्र स्थिति संभाल रहा है।
यात्रियों को राहत देने में रेलवे भी आगे
इस संकट के बीच कई यात्री रेल मार्ग की ओर रुख कर रहे हैं।
पश्चिम रेलवे ने घोषणा की है कि वह अतिरिक्त व्यवस्था कर रहा है ताकि अचानक बढ़ी यात्रियों की भीड़ को संभाला जा सके और लोगों को जरूरत के अनुसार यात्रा सुविधा दी जा सके।
