मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक—होर्मुज जलडमरूमध्य—को भारत समेत कुछ “मित्र देशों” के जहाजों के लिए खोलने का ऐलान किया है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर पड़े दबाव में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है।
हालांकि यह पूरी तरह से खुला नहीं है। ईरान ने साफ किया है कि यह रास्ता केवल “मित्र देशों” के लिए खुला है, जबकि दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के लिए अब भी बंद रहेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से लगभग 20% वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है।
इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ने लगी थीं और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई थी।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह फैसला बेहद राहत भरा माना जा रहा है।
- भारत के जहाज अब सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकेंगे
- तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने की संभावना बढ़ेगी
- महंगाई पर भी असर कम हो सकता है
यह भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि तनाव के बीच उसे “मित्र देश” की श्रेणी में रखा गया है।
लेकिन शर्तें भी लागू
ईरान ने यह भी साफ किया है कि यह अनुमति बिना शर्त नहीं है।
- जहाजों को “गैर-शत्रुतापूर्ण” होना जरूरी होगा
- उन्हें ईरान द्वारा तय किए गए सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा
- पहले से समन्वय (coordination) भी जरूरी हो सकता है
यानी रास्ता खुला है, लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति अभी भी नहीं बनी है।
वैश्विक असर और तनाव
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस जलमार्ग को खोलने की अपील की थी, क्योंकि इसके बंद रहने से तेल, गैस और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई प्रभावित हो रही थी।
दरअसल, अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण यह स्थिति बनी थी, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई थी।
