पंजाब में कृषि सुधारों और ग्रामीण विकास को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से जिन गांवों तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता था, वहां अब नहरों का पानी पहुंचने लगा है। पंजाब सरकार के अनुसार, 40-50 सालों में पहली बार राज्य के 1,365 गांवों तक नहर का पानी पहुंचा है, जिससे खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
पंजाब सरकार ने नहर सिंचाई प्रणाली को मजबूत करने के लिए ₹6,700 करोड़ का बड़ा निवेश किया है। इसका सीधा असर सिंचित भूमि पर देखने को मिला है, जो पहले 26% थी, अब बढ़कर 78% तक पहुंच गई है। इससे किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता कम हुई है और भूजल स्तर को भी राहत मिली है। नहरों के जरिए सिंचाई सस्ती और टिकाऊ होने के कारण किसानों की लागत में कमी आई है, जिससे उनकी आय में सुधार हो रहा है।
किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए फसलों के बेहतर दाम भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं। पंजाब में गन्ना किसानों को ₹416 प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है, जो देश में सबसे अधिक माना जा रहा है। इससे गन्ना उत्पादकों को सीधा फायदा मिल रहा है और उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है।
ग्रामीण विकास के मोर्चे पर भी सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। राज्य में 76,000 से अधिक परिवारों को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे हजारों लोगों का अपना घर बनाने का सपना पूरा हुआ है।
रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखा गया है। मनरेगा के तहत 9 लाख मजदूरों को रोजगार दिया गया और इस पर ₹1,100 करोड़ से अधिक की मजदूरी खर्च की गई। इससे ग्रामीण इलाकों में आय के नए स्रोत बने हैं और आर्थिक स्थिरता आई है।
नहर सिंचाई, किसानों को बेहतर दाम, ग्रामीण आवास और रोजगार योजनाओं के जरिए पंजाब में कृषि और गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। ये पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि राज्य के समग्र विकास को भी नई दिशा दे रही हैं।
