Barinder Kumar Goyal ने रावी-ब्यास ट्रिब्यूनल और पंजाब के पानी के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल 1986 को यह ट्रिब्यूनल बनाया गया था, लेकिन पिछले 40 वर्षों में हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। मंत्री ने कहा कि उस समय के हालात और आज की स्थिति में बड़ा अंतर है।
बरिंदर गोयल ने सवाल उठाते हुए कहा कि समझौतों के तहत पानी का बंटवारा तो कर दिया गया, लेकिन चंडीगढ़ अब तक पंजाब को क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग करता आ रहा है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आज पंजाब के पास एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य पहले ही पानी की कमी से जूझ रहा है और किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसी वजह से SYL नहर का मुद्दा अब खत्म माना जाना चाहिए।
बरिंदर गोयल ने कहा कि अब समय SYL नहीं बल्कि YSL पर चर्चा करने का है। उनका कहना है कि पंजाब के पानी और संसाधनों को बचाने के लिए नई सोच और नई नीतियों की जरूरत है।
