पंजाब सरकार ने किसानों के लिए नहरों की सफाई और सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने को लेकर बड़े स्तर पर वित्तीय पैकेज जारी किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार का दावा है कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को ज्यादा से ज्यादा नहरी पानी उपलब्ध कराना, भूजल स्तर बचाना और खेती की लागत कम करना है। सरकार के मुताबिक वर्ष 2025-26 के बजट में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग ₹2,971 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में नहरों के आधुनिकीकरण, सफाई और पानी की पहुंच बढ़ाने के लिए कुल ₹5,640 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं शुरू की गई हैं。
सरकार के अनुसार इस अभियान के तहत 14,000 किलोमीटर से अधिक नहरों और पाइपलाइन नेटवर्क की सफाई की जा रही है। साथ ही लगभग 7,000 नए वॉटरकोर्स विकसित किए जा रहे हैं, पुरानी नहरों की मरम्मत और लाइनिंग का कार्य चल रहा है तथा टेल एंड गांवों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।
विशेष रूप से मालवा क्षेत्र के फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा और मानसा जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां भूजल स्तर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पहले जहां पंजाब के केवल 21 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचता था, वहीं अब यह पहुंच बढ़कर 68 से 84 प्रतिशत खेतों तक हो गई है।
इस योजना से लाखों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर और फरीदकोट जिलों के हजारों गांवों को नई सिंचाई सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। सरकार के अनुसार फाजिल्का और मालवा क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं से लगभग 1.78 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं पटियाला के सनौर क्षेत्र में चल रही नहर लाइनिंग परियोजना से 40,066 एकड़ भूमि और 83 गांवों को लाभ पहुंचने का अनुमान है। फिरोजपुर फीडर नहर परियोजना के तहत लगभग ₹180 करोड़ की लागत से नहर की क्षमता 11,192 क्यूसेक से बढ़ाकर 13,873 क्यूसेक की गई है。
सरकार का मानना है कि इन परियोजनों के पूरा होने से किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होगी, बिजली की बचत होगी और खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंच सकेगा। इससे धान, कपास, मक्का तथा बागवानी फसलों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूजल स्तर में सुधार लाने में भी मदद मिलेगी। हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि धान सीजन के दौरान किसानों को नहरों के पानी का अधिक उपयोग करने के लिए करीब 21,000 क्यूसेक नहरी पानी छोड़ा गया है। सरकार का दावा है कि सिंचाई व्यवस्था में किए गए सुधारों के चलते कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में 2 से 4 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया है।
